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सुदेश मर गया हो तो ही अच्छा

Mon, 13 Jul 2015 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट।
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दस्यु बलखड़िया के गांव बरुई में सन्नाटा पसरा है। दस्यु के परिजनों में भी उसकी मौत को लेकर संशय है। कुछ का कहना है कि बलखड़िया मर गया, वहीं कुछ पुख्ता सुबूत न मिलने तक इसे मानने से इंकार करते हैं। हालांकि सभी ने ये बात जरूर कही कि अच्छा हो कि बलखड़िया की मौत की खबर ही आए ताकि हमारी दुश्वारियां कम हो सकें। बीहड़ में बसे बरुई से विकास श्रीवास्तव की रिपोर्ट-
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जिला मुख्यालय में सोनेपुर से आगे देवांगना पहाड़ से उतरकर दूसरी तरफ लगभग बीस किमी की दूरी पर रुखमा बुजुर्ग ग्राम पंचायत है। बहिलपुरवा थाने और विकास खंड मानिकपुर में आने वाली इसी ग्राम पंचायत का एक मजरा है बरुई। गत दो जुलाई को मारकुंडी थाना क्षेत्र के धाता कोलान में पुलिस से हुई मुठभेड़ के बाद साढ़े छह लाख के इनामी सुदेश पटेल उर्फ बालखड़े उर्फ बलखड़िया को गोली लगने और उसकी मौत की चर्चा जोरों पर है। हालांकि पुलिस ने पुख्ता प्रमाण न होने तक इसे मानने से इंकार किया है।

बलखड़िया के गांव बरुई में भी उसकी मौत को लेकर असमंजस बरकरार है। गांव में लोग ये मानने को तैयार नहीं हैं कि पुलिस की मुठभेड़ में दस्युओं में सिर्फ बलखड़िया को गोली लगी जबकि तीन सिपाही घायल हुए हैं। इस संदर्भ में बलखड़िया के पारिवारिक भाई ज्वाला प्रसाद के बड़े पुत्र पुष्पेंद्र से पुलिस लगातार कोतवाली में पूछताछ कर रही है। बलखड़िया की भाभी निर्मला ने बताया कि सुदेश गांव पार एक व्यक्ति के साथ जमीन के विवाद को लेकर बागी हुआ था। वहीं अन्य परिजनों ने कहा कि अच्छा हो कि बलखड़िया मारा गया हो ताकि उन्हें पुलिस की पूछताछ और अन्य परेशानियों से छुटकारा मिल सके।
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बलखड़िया से कोई वास्ता नहीं
गांव में मौजूद बलखड़िया के भतीजे पुष्पेंद्र के छोटे भाई लवलेश ने बताया कि उसका भाई सच बता रहा है। लगता नहीं कि बलखड़िया अब जिंदा होगा। उसने कहा कि असली जानकारी तो गिरोह का कोई सदस्य ही दे सकेगा। उसने बताया कि आठ तारीख को वह कर्वी किसी तारीख के सिलसिले में गया था तो पुलिस ने उसे भी पूछताछ के लिए पकड़ा था।

बाद में उसे छोड़ दिया गया। उसने बताया कि बलखड़िया ने किसी परिजन का कभी सहयोग नहीं किया। पुलिस चाहे जो कुछ भी कहे, उन लोगों का इससे कोई वास्ता नहीं। गैंग के साथ या अकेले बलखड़िया कभी गांव आया भी तो थोड़ी देर बाद चला गया।   

भतीजा खच्चू भी गैंग में शामिल  
बलखड़िया के भाई चुन्नीलाल का लड़का खच्चू भी गैंग में है। लवलेश ने बताया कि सभी लोग चाहते हैं कि खच्चू आत्मसमर्पण कर दे। उसने बताया कि चुन्नीलाल ने तो खच्चू को ढूंढ़ने की कोशिश में दिन रात एक कर दिए हैं। ये तक कहा है कि खच्चू हाजिर न भा तो मैं जान दै देहूं।

बागी होते ही बिखरा परिवार
ग्रामीणों ने बताया कि बलखड़िया के पिता रामरतन पटेल जलसंस्थान के ठेकेदार थे। लगभग पंद्रह साल उनके तीसरे नंबर के पुत्र बलखड़िया के बागी होने के बाद से पूरा परिवार बिखर गया। पुत्र हेमराज, चुन्नीलाल, महेश (मूकबधिर) कहीं चले गए हैं। सबसे छोटा बेटा कल्लू जेल में है तो फूलचंद्र ने छत्तीसगढ़ में ठिकाना बना रखा है। परिजनों में भी शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे पूछताछ के लिए पुलिस न ले गई हो।

रामरतन की पत्नी की काफी पहले मौत हो चुकी है। बरुई गांव में उसका घर अब वीरान पड़ा है। बलखड़िया की पत्नी और चार बच्चे (दो लड़के, दो लड़कियां, जिनमें एक लड़की की शादी हो चुकी है) कहीं दूसरे गांव में रह रहे हैं। गांव में मिले बलखड़िया के अन्य परिजनों में उसके बागी होने का रोष है तो पुलिस द्वारा बेवजह परेशान करने से आक्रोश भी है।

गांव में एक शेड के नीचे बैठे बलखड़िया के चाचा भइयालाल की उम्र नब्बे बसंत पार की है। उनकी बहू बेला देवी पत्नी नरेश ने कहा कि भइया पुलिस परेशान करत है। मनसवन का खेतन मां जाव मुश्किल है। मजदूरी करैं का परत है। बेला की जेठानी निर्मला ने कहा, हम तो बरबाद हुई गै। बच्चन की पढ़ाइयौ बर्बाद होई गै।

नहीं दिखता विकास
ब्राह्मण और कुर्मी बहुल बरुई मजरे में सौ घर हैं। अगर बलखड़िया को इस मजरे की चर्चा से निकाल दें तो गांव में कुछ भी ऐसा नहीं, जिससे इसे याद किया जा सके। कुछ लोगों की कोशिश से गांव को सपा सरकार ने जनेश्वर मिश्र ग्राम योजना के तहत शामिल कर लिया। यहां राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद मंडी समिति का भी निर्माण हो रहा है। मजरे में सिर्फ एक सरकारी स्कूल है।
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