छह लाख के इनामी बलखड़िया के अंत की पुलिसिया कहानी
में कई पेंच हैं। लोगों की जुबां पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर गैंग में
बलखड़िया को ही गोली कैसे लगी, वह भी सीने में। कहीं उसके गिरोह के किसी
सदस्य ने तो विश्वासघात नहीं किया।
बहरहाल इन सवालों का जवाब किसी
के पास नहीं है। जब तक बलखड़िया की मौत का कोई ठोस सुबूत मसलन, उसकी चिता
की राख, हड्डी या शरीर का कोई अवशेष पुलिस के हाथ नहीं लग जाता, तब तक
हकीकत सामने नहीं आएगी
पुलिस के पास उसकी एकमात्र फोटो थी और उसकी
मौत की पुष्टि भी फोटो से ही की गई। अगर पुलिस को उसकी मौत की पुष्टि करने
को कोई अवशेष, राख, हड्डी आदि न मिली तो सात साल इंतजार करना पड़ेगा,
क्योंकि सात साल बाद ही इसकी मौत पुलिस रिकार्डों में विधिवत दर्ज होगी।
एसपी पवन कुमार भी इस पेचीदगी को जानते हैं।
प्रेसवार्ता के दौरान
उनके चेहरे से यह साफ नजर आ रहा था कि काश, फोटो के अलावा भी कोई ऐसा
पुख्ता सुबूत होता, जिससे वह इस दुर्दांत के मौत की पुष्टि पूरी दमदारी से
कर पाते। उन्होंने कहा भी कि जंगलों में पुलिस का सर्चिंग अभियान जारी है।
लगभग
आधा जंगल छान मारा गया है, पर कुछ पुख्ता प्रमाण नहीं मिला। गौरतलब है कि
बलखड़िया की मौत की पुष्टि उसके भतीजे पुष्पेंद्र पटेल ने पुलिस से पूछताछ
में की थी। उसने बताया कि उसके पास गिरोह में शामिल खच्चू का फोन आया था।
उसके
बुलाने पर वह जंगल में गया था, जहां खच्चू ने मोबाइल में बलखड़िया की मृत
और चिता में रखी फोटो दिखाई थी। यही फोटो वाला मेमोरी कार्ड पुलिस को मिला।
इसके बाद ही बलखड़िया की मौत की पुष्टि करने को एसपी ने प्रेस कांफ्रेंस
की।
पुलिस की कहानी में कई पेंच हैं। बीहड़ के गांवों में चर्चा है
कि बलखड़िया कभी गिरोह में सामने नहीं रहता था। ऐसे में बलखड़िया को ही
गोली कैसे लगी?
पुलिस के अनुसार जिस दूसरे सदस्य को गोली लगी है,
वह कौन है? बलखड़िया की फोटो की पुष्टि भी उसके घरवालों ने ही की है, कहीं
यह कोई साजिश तो नहीं। ऐसा तो नहीं कि बलखड़िया को गैंग के ही किसी सदस्य
ने ही गोली मार दी हो? एक बात और कि बलखड़िया लगभग तीन महीने पहले भरतकूप
चौकी के गांव भगड़ा में रात को खेतों के पास लगे करंट के तारों से उलझकर
गंभीर रूप से जख्मी हो गया था।
जो फोटो हैं, उनमें उसके जलने के
कोई निशान नजर नहीं आते पर इस तथ्य को पुलिस यह कहकर नकार सकती है कि वह
सिर और पैर में जला था, जो फोटो में स्पष्ट नहीं है। पुलिस सूत्रों ने भी
इस संबंध में अपनी आशंकाओं को नाम जाहिर न करने की शर्त पर साझा किया।
बीहड़
के गांवों में एक चर्चा यह भी रही कि मुठभेड़ के दौरान गिरोह के ही एक
सदस्य ने बलखड़िया को गोली मार दी और भाग निकला। बात चाहे जो भी हो,
आशंकाएं चाहे जितनी हों पर बलखड़िया मारा गया है तो यह सभी के लिए राहत की
बात है कि एक आतंक का अंत हो गया।