चित्रकूट। जिले में बागे और पयश्वनी नदियों में अवैध खनन का खेल रात के अंधेरे में धड़ल्ले से चल रहा है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन इस कारोबार पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल है। सोशल मीडिया पर भी इस अवैध खनन के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि अमर उजाला नहीं करता।
अवैध खनन सकरौली, मकरी पहरा, भंभौर, परसौंजा, रेहुटा, ओरा, लोहदा, पनौटी सहित कई गांवों के किनारे रात के समय किया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, खनन कारोबारी शाम होते ही सक्रिय हो जाते हैं और नदियों की धारा मोड़कर मशीनों व ट्रैक्टरों से रेत निकालते हैं। इसके लिए वे लोकेटर भी लगाए रहते हैं, जो अधिकारियों की सूचना लीक करते हैं। सूचना देने के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं करती। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है और नदियों का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। ग्रामीणों ने खनिज विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं, जो कई महीनों से चल रहे अवैध खनन पर कोई कार्रवाई नहीं कर सका है।
एसडीएम फूलचंद्र यादव ने स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रीय लोग रात में अवैध खनन करते हैं और सुबह गायब हो जाते हैं। वहीं, जिला खनिज अधिकारी रणवीर सिंह का कहना है कि उन्हें फिलहाल कहीं भी अवैध खनन की जानकारी नहीं है और सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है।