चित्रकूट। श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर कथा वाचक ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। कहा कि मित्रता कृष्ण और सुदामा जैसी होनी चाहिए। यह संसार बड़ा ही स्वार्थी है। जब तक व्यक्ति का स्वार्थ निकलेगा तब तक वह आप का सम्मान करेगा। इसके बाद ठोकर मार कर अलग कर देगा।
मानिकपुर कस्बे मे चल रही भागवत कथा में आचार्य नवलेश दीक्षित ने सुदामा चरित्र का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आज सच्चे मित्र का बड़ा ही अभाव है। मित्र वही होता है। जो मित्र के दुख में दुखी और सुख में सुखी होता है। धन्य हैं श्रीकृष्ण, जिन्होंने एक निर्धन दीन दुखी ब्राह्मण को गले से लगाया और दो मुट्ठी चावल खाकर दो लोक की संपत्ति दानकर दिया। यही तो परमात्मा की उदारता का परिचय है।