चित्रकूट। भारतीय साहित्यिक संस्थान की काव्य गोष्ठी में मंगलवार को ज्वलंत विषयों पर कवियों ने अपनी राय रखी। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता संस्था के डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह भ्रमर ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं संस्थापक देशराज पांडेय की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संगीत शिक्षक वैभव जेजुल्कर ने वंदना प्रस्तुति दी। इस दौरान संस्था के सक्रिय सदस्य व विकलांग विवि के हिंदी प्रवक्ता पीयूष द्विवेदी को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होने पर अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया।
काव्य पाठ की श्रृंखला में श्रीनारायण तिवारी ने कोशिश से ढहते मुश्किल का किला, ये मरुस्थल में भी उद्यान खिला सकते हैं प्रस्तुत किया। संदीप श्रीवास्तव ने अगर सितम ढाने आई ढाने दो, आंधी का रास्ता मत रोको आने दो, शशि यादव ने जहां पर देव दर्शन हो, वहीं भगवान होता है, जहां ऋषियों की वाणी हो वहीं उत्थान होता है सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी। हास्य कवि शिवपूजन ने हमारी चेतना में ही प्रभु का अंश रहता है, किसी में कृष्ण रहते हैं, किसी में कंस रहता है सुनाया। वीरेंद्र प्रताप सिंह भ्रमर ने झांक रहे हैं मन में सपने, निर्मल नेह निरख नैनामृत, जाग उठा मन में अपनापन, पलकों की कोमल छाया में, कैसा है अद्भुत परिवर्तन, पीयूष द्विवेदी ने ख्वाब करें हम अपने पूरे, साल नया है सुनाकर श्रोताओं का मन जीता। इस दौरान सर्वोदय सेवा आश्रम के अभिमन्यु ने नदियों पर विचार प्रकट किया। संचालन संस्था के डा. मनोज द्विवेदी ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। इस मौके पर प्रयाग नारायण अग्रवाल, दिनेश सिंह चौहान, प्रियंक प्रियदर्शन, रामलाल प्राणेश आदि मौजूद रहे।