चित्रकूट। यदि नंदकिशोर का भतीजा अंकुश दीवार फांदकर अंदर न आता तो शायद दो की जगह तीन की मौत हो जाती। अंकुश त्रिपाठी ने बताया कि जब वह कूदा तो चाचा नंदकिशोर बंदूक से बेटी खुशी को गोली मार चुका था। इसके बाद वह खुद भी कान में बंदूक सटाकर गोली चलाने वाला था। उसने झटक दिया। इससे बंदूक गिर गई। दरवाजा खोलने पर नंदकिशोर बंदूक और मोबाइल छोड़कर भाग निकला।
नंदकिशोर त्रिपाठी ने लाइसेंसी दोनाली बंदूक से दो फायर किए। लोगों ने बताया कि खुशी की जांघ और पसली में गोली लगी है। ऐसे में आशंका है कि उसे दो गोली मारी गई है। हालांकि पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से ही इसका खुलासा होगा।
नंदकिशोर की पत्नी सीमा को एक ही गोली उसके सीने के पास मारी गई है। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। बरामद बंदूक में एक खोखा फंसा मिला है। इसके अलावा दो खोखे अलग बरामद हुए। थाना प्रभारी गुलाब सोनकर ने बताया कि फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट टीम ने घटनास्थल से सुबूत जुटाए हैं। मौके से दोनाली बंदूक बरामद हुई है। जो नंदकिशोर के नाम है। कुछ कारतूस मिले हैं। बंदूक में एक खोखा फंसा मिला है। दो अन्य खोखे मिले हैं। फिलहाल मामले की पूरी जानकारी जांच के बाद ही हो सकेगी। महिला को एक गोली लगी है।
पशुमित्र ने दिखाई क्रूरता
नंदकिशोर उर्फ नंदू पशु विभाग में पैरावेट (पशु मित्र) के पद पर कार्यरत है। पशुमित्र ने परिवार के साथ जो क्रूरता दिखाई, उसकी हर जगह चर्चा हो रही है। उसे जानने वाले लोगों ने कहा कि आखिर क्या कारण था कि वह इतना कठोर निर्णय लेने के लिए मजबूर हुआ। वैसे वह ऐसा क्रूर तो नहीं था। परिजनों ने ही बताया कि दो बेटियों में बड़ी बेटी खुशी के रवैये से वह नाखुश था। उसने कई बार परिजनों और पत्नी से कहा कि उसकी इज्जत खराब हो रही है। बेटी को गलत रास्ते से जाने से न रोक पाने से वह क्षुब्ध था। इसके चलते उसने क्रूरतापूर्ण निर्णय लिया।
इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक तस्वीर और वीडियो की चर्चा
वैसे तो खुशी त्रिपाठी 18 वर्ष की हो गई थी, लेकिन उसकी पढ़ाई बीच में ही परिजनों ने रोक दी थी। इस कारण उसने इसी साल हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। चर्चा है कि ननिहाल के गैर बिरादरी के एक युवक के साथ उसकी आपत्तिजनक स्थिति की कई फोटो इंस्टाग्राम पर थीं। इसके अलावा एक आपत्तिजनक वीडियो भी था, जिसे पिता ने देख लिया था। इस बात को लेकर वह मानसिक तनाव में था। पत्नी और बेटी से इसे लेकर कई बार विवाद हुआ था।
हाथ में गुदवाया था प्रेमी का नाम
खुशी ननिहाल के ही एक युवक से प्रेम करती थी। दोनों एक सप्ताह पूर्व घर से चले गए थे। परिजनों ने युवक के घर उलाहना दिया था, लेकिन लोकलाज के कारण पुलिस सूचना नहीं दी। चार दिन पूर्व गांव लौटने पर पिता का पुत्री से विवाद हुआ। मां सीमा ने बेटी का बचाव किया था। बताते हैं कि खुशी ने जहर खा लिया था। उसका प्राइवेट इलाज कराया गया था। खुशी ने बायें हाथ में प्रेमी का नाम गुदवाया था।
खुशी ने सबको किया गमगीन
ग्रामीणों ने बताया कि खुशी का जन्म होने पर माता-पिता ने खुशियां मनाई थी और भंडारा किया था। इसी कारण उसका नाम खुशी रखा था। वह बेहद होशियार भी थी। उसका कोई भाई नहीं था। एक छोटी बहन है, लेकिन माता-पिता व परिजन सबसे ज्यादा खुशी को ही मानते थे। खुशी की मौत से पूरा गांव शोकाकुल है। सबके जुबान से यही निकला कि खुशी ने सबको गमजदा कर दिया।