आतंकवाद के खिलाफ भगवान श्रीराम ने धनुष को धारण किया। यज्ञ को विध्वंश से बचाया। निसाचरों को नष्ट करने का जय घोष चित्रकूट से ही हुआ। विश्व के लोग बढ़ते आतंकवाद को मिटाने के लिए उपाय खोज रहे हैं मगर अभी तक कोई ठोस समस्या का हल नहीं हो सका है। वहीं विद्वान जनों का मानना है कि रामायण काल में ही इसका उपाय मिल गया था। भगवान राम ने आतंक रूपी रावण व उसककी सेना को परास्त किया था।
राष्ट्रीय रामायण मेला में बुधवार को संगोष्ठी में डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने कहा कि आतंक से निपटने के लिए पूरा विश्व लगा है। रामायण काल में ही भगवान राम ने इस आतंक रूपी काल से निपटा था। वह संदेश आज भी सबके मन में है। भारत ही इसे पूरे विश्व को इसका प्रचार प्रसार कर शांति की दिशा में काम कर सकता है। डा. शंकर दत्त ओझा ने कहा कि रामायण की परिकल्पना भगवान शिव की परिकल्पना है।
आतंक को मिटाने के लिए जिस आत्मबल की आवश्यकता है वह हरि के चरित्र और उनके विभिन्न अवतार की लीलाओं से पूरी हो सकती है। डबरा के श्रीलाल पचौरी ने कहा कि हनुमान का चरित्र आतंकवाद को मिटाने के लिए प्रेरक है। विकलांग विश्वविद्यालय की डा. प्रतिमा शुक्ला ने सीता चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि उनसे शक्ति ऊर्जा पाकर हनुमान ने दानवीय शक्तियों का संघार किया था। खंडवा के डा. श्रीराम परिहार ने भी विचार व्यक्त किया। शक्ति और संगठन के बिना राष्ट्र को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।
मारीशस के धनुष चंद्र ने कहा कि मारीशस की दीवारों में जो चित्र मिलते हैं उनमें आतंक से लड़ते हुए राम सेना के योद्धा दिखाई पड़ते हैं। उज्जैन के डा. आनंद वर्मा, डा. कामता प्रसाद त्रिपाठी, डा. हरिप्रसाद दुबे ने आतंकवाद पर विचार रखते हुए बताया कि वृद्ध जटायु ने जिस प्रकार संकट में फंसी नारी को प्राणोत्सर्ग करके दुष्ट रावण से मुक्त कराने का प्रयास किया वैसा दूसरा प्रमाण दुर्लभ है।
रामायण मेला परिसर में बुधवार संस्कारशाला का आयोजन हुआ। जिसमें इलाहाबाद के साहित्यकार डा. सीताराम सिंह विश्व बंधु ने कहा कि रामायण मानव जीवन की कार्यशाला है। संस्कार विहीन मनुष्य और पशु में कोई अंतर नहीं है। चरित्र निर्माण और आचरणवान बने रहने के लिए रामचरित मानस के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना होगा।
बच्चों में अच्छे संस्कार लाने होंगे। डा. सभापति मिश्र ने राष्ट्रधर्म और राष्ट्रीय एकता के लिए रामचरित मानस को जीवन के लिए संजीवनी बताया। कृष्णकांत मालवीय व राधारानी वृृंदावन ने कहा कि जब तक वृृंदावन में प्रभु श्रीकृृष्ण की राधारानी का रास होता रहेगा और प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में सीताराम की गूंज होगी। तब तक देश का कोई अहित नहीं होगा।
रामायण मेला में झांसी के भजन गायक दिनेश सोनी सकरार ने श्रीराम व कृष्ण काव्य पर आधारित कई भजनों को सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। बुंदेलखंडी लोकनृत्य पार्टी महोबा ने आदिम जनजाति आदिवासियों को लोकप्रिय राई नृृत्य जंगली वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुत किया। आकर्षण का केंद्र असम का गोहावटी नृत्य दल का असमिया लोक नृत्य रहा।
वहीं वृंदावन के देवकी नंदन शर्मा की मंडली ने भक्त प्रहलाद का प्रहसन, ताड़का बध, अहिल्या उद्धार का मंचन किया। इस मौके पर पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस, नगरपालिका अध्यक्ष नीलम करवरिया, करूणा शंकर द्विवेदी, राजेश करवरिया, शिवमंगल शास्त्री, राजाबाबू पांडेय, यूसुफ सिद्दीकी, हरवंश प्रसाद पांडेय, भालेंद्र सिंह, मनोज गर्ग, ज्ञानचंद गुप्ता, कलीमुद्दीन बेग, घनश्याम अवस्थी, राम प्रकाश श्रीवास्तव, प्रिंस करवरिया, सोनू मिश्रा, मैसूर अली, गोकुल पांडेय, जितेंद्र करवरिया आदि रहे।