फोटो 19 सीकेटीपी-06-अस्पताल में बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष। संवाद
चित्रकूट। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने को खोह में 78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 200 बेड का मातृ-शिशु अस्पताल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। वर्ष 2019 में स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किए जाने के बाद भी आज तक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और खून की कई आवश्यक जांच की सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। इस कारण गर्भवती महिलाओं और बच्चों को साधारण जांच के लिए भी करीब 10 किमी दूर जिला अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
वर्ष 2015 में निर्मित इस अत्याधुनिक अस्पताल में 200 बेड की व्यवस्था और डॉक्टरों की तैनाती की गई थी। हालांकि, आवश्यक जांच सुविधाओं के अभाव के चलते यह अस्पताल सिर्फ एक डिलिवरी सेंटर बनकर रह गया है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 200 से अधिक महिलाएं और बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें अधिकांश गर्भवती महिलाएं होती हैं। बुनियादी जांच सुविधाएं न होने से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हार्मोनल, विटामिन सहित सामान्य रक्त जांच के लिए भी मरीजों को भटकना पड़ता है।
फोटो-08-शंकुतला
खोह निवासी शकुंतला ने बताया कि बेटी को दिखाने अस्पताल आई हैं। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा है लेकिन अस्पताल में सुविधा नहीं है। इसलिए मजबूरी में यहां से 10 किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ेगा। -
फोटो-09-रामलाल
भौंरी के रामलाल ने बताया कि बिटिया को दिखाने के लिए आए हैं। एक्सरे और विटामिन की जांच के लिए डॉक्टर ने लिखा है लेकिन यहां कोई व्यवस्था ही नहीं है। अब प्राइवेट में जांच करानी पड़ेगी।
फोटो 19 सीकेटीपी-06-अस्पताल में बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष। संवाद
फोटो 19 सीकेटीपी-06-अस्पताल में बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष। संवाद
फोटो 19 सीकेटीपी-06-अस्पताल में बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष। संवाद