मऊ। यमुना किनारे के 24 गांवों में होलिकादहन तो रविवार की रात हो गया, लेकिन रंग एक दिन बाद मंगलवार को खेला जाएगा। जनश्रुति के अनुसार यह परंपरा दस दशक से ज्यादा समय से चली आ रही है।
मंडौर गांव के दिनेश तिवारी और मऊ कस्बे के राजेश द्विवेदी के मुताबिक मऊ तहसील क्षेत्र से सटे कौशंाबी जिले के बेरोचा गांव के जमींदार जंगल में शिकार करने गये थे। शिकार के दौरान जानवरों के हमला करने पर जमींदार के कारिंदे बैजू ने अपनी जान देकर मालिक को बचा लिया था।
शिकार से लौटने के बाद जमींदार ने अपने क्षेत्र में आने वाले 24 गांवों में दूसरे दिन होली न मनाने का फरमान दिया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। बैजू के निधन की शोक में यह नियम बनाया गया था, इसलिए एक बाद रंग खेलने के आयोजन को इन 24 गांवों में बैजल के नाम से जाना जाता है।