चित्रकूट। स्वस्थ नारी, सशक्त समाज अभियान की चमक जिले में खोखली साबित हो रही है। विभाग हजारों महिलाओं और बच्चों के इलाज के दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ एक महिला रोग विशेषज्ञ और तीन बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब डॉक्टर ही नहीं हैं तो इलाज आखिर कौन कर रहा है।
जिले के मानिकपुर, मऊ, रामनगर, रैपुरा, राजापुर, पहाड़ी और शिवरामपुर सीएचसी में से केवल राजापुर केंद्र पर महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता मिश्रा तैनात हैं। मानिकपुर सीएचसी पर डॉ. स्वाति पाठक की नियुक्ति थी, लेकिन एक माह पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया। शेष सभी सीएचसी पर महिला रोग विशेषज्ञों का अभाव है। बाल रोग विशेषज्ञों की भी स्थिति चिंताजनक है। केवल राजापुर, पहाड़ी और मानिकपुर सीएचसी में उनकी तैनाती है, जबकि अन्य केंद्र खाली पड़े हैं।
जिला अस्पताल की तस्वीर भी उम्मीद जगाने वाली नहीं है। यहां महिला रोग विशेषज्ञ सिर्फ एक हैं और बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या छह है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं और बच्चे प्राथमिक स्तर पर विशेषज्ञ इलाज से वंचित रहते हैं और मजबूरन जिला अस्पताल का रुख करने को विवश हैं।
विभाग का दावा है कि अभियान के तहत अब तक हजारों महिलाओं और बच्चों का इलाज किया जा चुका है। मानिकपुर सीएचसी और छह पीएचसी में एक ही दिन में 620 महिलाओं के इलाज का रिकॉर्ड बताया गया, आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल 1668 मरीजों के इलाज यहां करने का दावा किया गया है। इसी तरह मऊ सीएचसी में 136 मरीज देखे गए, जिनमें 36 गर्भवती महिलाएं और जुकाम-बुखार से पीड़ित सौ मरीज शामिल थे।
लेकिन हकीकत यह है कि जब महिला रोग विशेषज्ञ ही तैनात नहीं हैं तो इतने बड़े पैमाने पर इलाज का दावा कैसे संभव है। चिकित्सकों की भारी कमी ने अभियान की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साफ दिख रहा है कि योजनाएं चाहे जितनी आकर्षक हों, डॉक्टरों के बिना वे महज कागजों तक सीमित रह जाती हैं।
वर्जन
चिकित्सकों की कमी किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद स्वस्थ नारी सशक्त समाज अभियान के तहत अस्पताल आने वाले मरीजों का इलाज वहां तैनात चिकित्सक कर रहे है।
-डॉ. भूपेश द्विवेदी सीएमओ