मऊ (चित्रकूट)। कहने को 30 बेड से अधिक वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मऊ इन दिनों इलाज की व्यवस्था के नाम पर सिर्फ रेफर सेंटर बना है। बुधवार को बुखार से पीड़ित एक मरीज दो घंटे तक गेट के बाहर तड़पता रहा लेकिन उसका इलाज नहीं किया गया। उसे बेड तक नसीब नहीं हुआ।
कुछ ऐसा ही अन्य मरीजों के साथ आए दिन हो रहा है। स्थानीय लोगों की मानें तो यहां आने वाले मरीज को दो चार गोली देकर बस रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में इसे लोग रेफर सेंटर भी कहने लगे हैं।
कोरोना काल के दौरान हाईवे किनारे तहसील क्षेत्र के प्रमुख अस्पताल सीएचसी में छह डाक्टर व 12 से अधिक का स्टाफ है लेकिन कोई मरीज आता है तो उसके इलाज के लिए एक डाक्टर या एक नर्स तक घंटों नहीं मिलते हैं। बुधवार को तिलौली गांव निवासी बाबूलाल पुत्र महादेव को लेकर उसका पुत्र शिवाकांत आया और पर्चा बनवाने लगा। इसी बीच उसके पिता बुखार के चलते वहीं पर लेट गए।
बमुश्किल अंदर ले जाकर इलाज कराने का प्रयास किया लेकिन कोई स्टाफ नहीं मिला। एक घंटे बाद स्टाफ आया तो उसे दो चार गोली देकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन बार-बार भर्ती कर इलाज करने को कहते रहे लेकिन किसी ने एक न सुनी। मरीज व तीमारदार को अस्पताल से बाहर जाने को कहा गया। जिससे वह मरीज दो घंटे तक अस्पताल गेट की सीढ़ियों पर लेटा रहा। इसके बाद एंबुलेंस आई तो फिर उसे परिजन लेकर जिला अस्पताल आए।
स्थानीय लोगों ने बताया यह नजारा प्रतिदिन देखने को मिलता है। ओपीडी सेवा बंद हैं और अस्पताल में आक्सीजन की व्यवस्था भी नहीं है। कोविड जांच कराने आने वाले मरीज भी भटकते रहते हैं। मामूली घायल या बीमार लोगों का इलाज करने से स्टाफ मना कर देता है। स्थानीय रिटायर्ड सैनिक इंद्रेश त्रिपाठी ने बताया कि सरकार लाखों रुपये अस्पतालों में खर्च कर रही है लेकिन मऊ के सीएचसी के हाल बुरे हैं। बस हर स्टाफ कोविड का बहाना लेकर इलाज करने से इनकार कर देता है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और मरीजों का इलाज प्राथमिकता से कराने का इंतजाम किया जाए।