सोमवार सुबह तबीयत बिगड़ने पर उसे इमरजेंसी वार्ड में लेकर पहुंचे तो वहां मौजूद डॉक्टर व स्टाफ ने इंजेक्शन लगाने की बात कही। परिजनों ने बताया कि जो इंजेक्शन वहां रखा था, वह अप्रैल 2022 का था। विरोध किया तो स्टाफ ने अंदर से दवा लाने की बात कही, लेकिन सीरिंज में एक्सपायरी इंजेक्शन ही भरकर लगा दिया।
इंजेक्शन लगते ही बच्ची का शरीर अकड़ने लगा और देखते ही देखते उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजनों अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर सपा के सदर विधायक अनिल प्रधान और भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश खरे मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली।
सीएमएस डॉ. सुधीर कुमार शर्मा ने किसी तरह परिजनों को शांत कराया। उन्होेंने तत्काल प्रभाव से चार स्वास्थ्यकर्मियों को निलंबित करते हुए डॉक्टर संतोष के खिलाफ कार्रवाई के लिए लखनऊ महानिदेशक को पत्र लिखा है।
दवा स्टोर इंचार्ज अशोक सिंह को हटाकर अमर सिंह को नियुक्त किया है। मौके पर पहुंचे सीओ सिटी हर्ष पांडेय, कोतवाल एके मिश्रा ने इंजेक्शन को कब्जे में ले लिया है। बच्ची के शव का दो डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। हालांकि इसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। बच्ची के पिता प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं।
सीएमएस बोले-स्टाफ ने बरती लापरवाही, डीएम ने मांगी रिपोर्ट
सीएमएस ने बताया, प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर फार्मासिस्ट धर्मेंद्र मिश्रा, राममिलन, वार्ड ब्वाय अवधेश को निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य कर्मी कुलदीप की सेवा समाप्ति कर दी गई है।
डॉ. वंदना, एसीएमओ डॉ. आजाद, डॉ. आरबी लाल का पैनल दो दिन में जांच कर रिपोर्ट पेश करेगा। उधर, डीएम अभिषेक आनंद ने भी जिला अस्पताल से रिपोर्ट मांगी है। बच्ची के परिजनों ने कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।