विकास के गुजरात मॉडल की चर्चा कर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे उसकी अवधारणा धर्मनगरी से होकर ही निकली है। यह सही है कि चुनावी दौरे तो प्रधानमंत्री ने बुंदेलखंड के तीन बार किए। लेकिन ग्रामीण विकास एवं पुर्नरचना के मॉडल को नजदीक से जानने के लिए वह पहले भी गुपचुप तरीके से नानाजी से मिलने मप्र स्थित आरोग्य धाम आ चुके हैं। तब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
गुजरात के ग्रामीण इलाकों में अपनाए गये विकास माडल की परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्मनगरी से ही सीखी थी। इसके लिए उन्होंने समाजसेवी नानाजी देशमुख के गांव में किये गये विकास कार्यों को देखने के लिए दो बार गुप्त रूप से धर्मनगरी का दौरा किया था। उस समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर थे। विख्यात समाज सेवी नाना जी देशमुख ने चित्रकूट जिले से लगे मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के 500 गांवों को विकास कार्य करने के लिए गोद लिया था। जिसमें उनका प्रमुख उद्देश्य ग्रामीणों को स्वरोजगार की प्रेरणा देना व स्वस्थ शरीर के लिए आयुर्वेद व योग की शिक्षा के लिए जागृत करना था।
इसके लिए प्रत्येक गांवों में समाजसेवी शिल्पी दंपती की ड्यूटी लगाई गई है। विकास कार्यों के बारे में जब मोदी को जानकारी हुई तो उन्होंने इसके लिए पहले गुजरात से टीम भेजी इसके बाद वह खुद दो बार गुप्त रूप से निरीक्षण कर गांवों के विकास माडल की जानकारी ली। तत्कालीन प्रधान सचिव भरत पाठक ने बताया कि नरेंद्र मोदी गुपचुप तरीके से नानाजी से ग्रामीण विकास के लिए काम करने की जानकारी लेने दो बार धर्मनगरी आ चुके हैं। इसके अलावा उनकी टीम भी बीच-बीच में यहां आती थी।