सावन माह की हरियाली अमावस्या पर इंद्र देव मेहरबान रहे तो लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाई। भक्तों ने स्वामी मत्गयेंद्रनाथ का जलाभिषेक कर भगवान कामतानाथ की पूजा की। सुबह से लेकर शाम तक ट्रेन व बसों की छत पर बैठकर श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र पहुंचे।
मुख्यालय के रामघाट पर सोमवार से ही श्रद्धालुओं का आगमन होने लगा। मंगलवार को सूर्योदय के पहले लाखों श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे और ऊं नम: शिवाय के जाप के साथ मंदाकिनी में डुबकी लगाई।
श्रद्धालुओं में मत्गयेंद्रनाथ स्वामी का जलाभिषेक करने के बाद कामदगिरी पर्वत की परिक्रमा लगाकर मन्नत मानी। जिला प्रशासन ने मेला क्षेत्र समेत सभी स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात किया था। जिससे मेला शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
दो दिन पूर्व मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से सभी चिंतित थे लेकिन मंगलवार को मंदाकिनी का जलस्तर सामान्य ही रहा। डीएम मोनिका रानी व एसपी केके चौधरी ने सुबह तीर्थ क्षेत्र का भ्रमण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
यूं तो सावन माह में भगवान शिव की पूजा होती है लेकिन इस माह में पड़ने वाले मंगलवार को हनुमान मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ रही है। मान्यता है कि सावन के मंगलवार को हनुमानजी का विशेष आशीर्वाद मिलता है।
अमावस्या पर आए लाखों श्रद्धालुओं ने धर्मनगरी के सभी हनुमान मंदिरों में माथा टेका। हनुमान धारा मंदिर की सीढ़ियों पर सुबह से लंबी लाइन लगी रही।
तीर्थ क्षेत्र आए हजारों किसानों ने मंदाकिनी में डुबकी लगाने के बाद मत्गयेंद्रनाथ स्वामी व कामतानाथ भगवान को धान की बेड़ भी चढ़ाई। मान्यता है कि इस सीजन की फसल के बीज को किसान पहले भगवान को चढ़ाकर फिर बुआई करता है। जोरदार बारिश को देखते हुए किसानों ने धान की अच्छी फसल होने की संभावना जताई है।
हरियाली अमावस्या पर श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए प्रशासन ने पांच स्पेशल ट्रेन व दो सौ अतिरिक्त रोडवेज बसों का संचालन कराया था। इसके बावजूद ट्रेन व बस की छतों पर बैठकर श्रद्धालुओं ने यात्रा की।
चित्रकूट। अमावस्या के पूर्व तैयारियाें की बैठक में डीएम मोनिका रानी ने पुलिस व एआरटीओ विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई थी कि टेपों में यात्री लटकते मिले तो कड़ी कार्रवाई होगी। मंगलवार को इसका असर भी दिखाई पड़ा।
तड़के से ही एआरटीओ और यातायात पुलिस की टीमों ने ओवरलोड टेंपो को रोककर यात्रियों को उतारा। हालांकि कुछ टेपाें चालक अधिकारियों की आंख में धूल झोंककर ओवरलोड सवारी ढोते रहे।