धर्मनगर में मकर संक्रांति का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाकर कामदगिरी की परिक्रमा की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने साधु व संतों, महंतों को खिचड़ी दान देकर आशीर्वाद लिया। वहीं घरों में तिल के लड्डू का भोग लगाया गया।
नगर व ग्रामीण क्षेत्र में शुक्रवार सुबह से ही मंदाकिनी, पैयुस्वनी, यमुना व अन्य नदियों के किनारे मेले ऐसा नजारा रहा। स्नान करने आई महिलाओं ने सूर्य उपासना के बाद दान किया। इसके बाद नदी किनारे सजी दुकानों से बच्चों ने खरीददारी की। इसके साथ ही गन्ने की खूब खरीददारी हुई। सर्वाधिक भीड़ रामघाट मंदाकिनी पर रहीं। दूर दराज क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाकर कामदगिरी की परिक्रमा की। इस दौरान तीर्थक्षेत्र मे सभी मठ-मंदिरों में जाकर लोगों ने खिचड़ी दान कर आशीर्वाद लिया। मंडलायुक्त एल वेंकेटेश्वर लू व डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने डीएम नीलम अहलावत व एसपी के साथ मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर भगवान मत्यगयेंद्रनाथ के दर्शन किए।
भरतकूप प्रतिनिधि के अनुसार भरतकूप मंदिर में हजारों आस्थावानों ने मंदिर में माथा टेककर पवित्र कूप के जल का आचमन किया। सुबह से लेकर शाम तक मेले में जमकर खरीददारी हुई। बच्चों में झूले को लेेकर बड़ी उत्सुकता देखी गई। पहाड़ी प्रतिनिधि के अनुसार साईंपुर में मकर संक्रांति का मेला लगा।
जिसमें हिंदू--मुस्लिम एकता का भी दिखाई पड़ी। यहां स्थापित वलीशाहदाता की मजार पर मकर संक्रांति को ही मेला लगता है। जिसमें दोनों धर्मों के लोग समान रूप से सहभागिता करते हैं। मकर संक्रांति पर्व पर मुख्यालय व आसपास के क्षेत्रों में पतंगबाजी का भी नजारा देखने को मिला। सुबह से विभिन्न कलर व डिजाइन की पतंगे आसमान में उड़ती नजर आई। वहीं छोटे-छोटे बच्चे कटी पतंग को पाने के लिए उसके पीछे भागते रहे।