मुख्यालय के पुरानी बाजार के बूथ में मतदान पर्ची दिखाते लोग
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लोकतंत्र के महापर्व पर इस बार मतदाताओं ने वोटों की बारिश की। लोकसभा व पिछले विधानसभा चुनाव के मतदान प्रतिशत को पीछे छोड़ते हुए इस बार 63 प्रतिशत मतदान हुआ। जिले की चित्रकूट व मानिकपुर सीट के कुल 26 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद हो गया। देर रात तक इन मशीनों को स्ट्रांग रूम में रखवा दिया गया। दोनों विधानसभा क्षेत्र के चार मतदान केंद्रों में जनसुविधाएं न होने पर कुछ घंटों के लिए मतदान का बहिष्कार हुआ। दो बूथों की ईवीएम ने भी धोखा दिया।
इससे आधे घंटे तक वोटिंग प्रभावित रही। पूरे चुनाव में डाकुओं से प्रभावित इलाके में अजीब सी खामोशी के साथ मतदान हुआ। मतदान का बहिष्कार करने वाले मतदाताओं को चुनाव प्रेक्षक कृष्णकुमार, बरासत सलीम, जिला निर्वाचन अधिकारी मोनिका रानी व एसपी डीपी सिंह ने समझाकर मतदान कराया।
गुरुवार सुबह से ही धर्मनगरी के सभी बूथों पर मतदाताओं का पहुंचना शुरू हो गया। सीतापुर के पोद्दार इंटर कालेज और पूर्व माध्यमिक विद्यालय खोही के दो बूथ में ईवीएम मशीनों से बीप की आवाज न आने की शिकायत मिली तो लगभग आधे घंटे तक मतदान प्रभावित हुआ। इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने पहुंचकर मशीन दुरुस्त की। मानिकपुर, मऊ के अलावा मुख्यालय के कई बूथों में रोशनी के पर्याप्त इंतजाम न होने से अंधेरे में ही मतदान हुआ।
दोनों विधानसभा क्षेत्र के केकरमार, अमरपुर, खप्टिहा और पथरामानी गांव के मतदाताओं ने सड़क बिजली व पानी की समस्याओं को लेकर मतदान का बहिष्कार कर दिया। जानकारी होते ही प्रेक्षक, डीएम व एसपी गांव पहुंचे और ग्रामीणों को समझाकर मतदान कराया। इन सेेंटरों पर दो से चार घंटे तक मतदान रुका रहा।
दस्यु प्रभावित क्षेत्रों में खामोशी से मतदाता लाइन में लगा रहा और गांव की गलियों में बैैठे बुजुर्गों के चेहरे के भाव ऐसे रहे जैसे कुछ जानते ही नहीं। कई बार कुरेद कर दस्युओं के फरमान की बात पूछी गई तो सभी टालमटोल करते रहे। इन सबके बीच सुबह से शाम तक बूथों में वोटों की बारिश होती रही। जिसका नतीजा यह रहा कि निर्धारित अवधि शाम पांच बजे के बाद भी मानिकपुर और भरतकूप क्षेत्र के दो दर्जन बूथों पर मतदाताओं की लाइन लगी रही। पांच बजे तक मतदान 61.5 प्रतिशत रहा तो अंतिम आंकडे़ मिलने पर यह 63 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसके बाद सभी पोलिंग पार्टियों ने सीलबंद ईवीएम को रामायण मेला परिसर में बने स्ट्रांग रूम में जमा कराया। यह क्रम देर रात तक चलता रहा।