चित्रकूट। साइबर क्राइम के अपराधी ठगी के नये तरीके ढूंढते रहते हैं। कुछ लोगों को उनके रिश्तेदार बनकर फोन किया कि बीस हजार रुपये उसके खाते में भेजे हैं। इसका एक डमी मैसेज भी भेजते हैं। फिर उससे कहते हैं कि 15 हजार अभी लौटा दो नेटवर्क की समस्या है। इसके शिकार डॉक्टर से लेकर कई व्यापारी भी हैं। पुलिस ने ऐसे दस बैंक, मोबाइल व अन्य तरीके से शिकार लोगों की पांच लाख 66 हजार रुपये पुलिस ने लौटाए हैं। एसपी वृंदा शुक्ला ने बताया कि साइबर क्राइम आजकल थोड़ी सी लापरवाही में बढ़ रहे हैं। ऐसे लोगों की रिपोर्ट के आधार पर साइबर सेल के प्रभारी विजय सिंह, सर्वेश व प्रशांत के प्रयास से पांच लाख 66 हजार रुपये की वापसी उनके खाते में कराई गई है। इसमें चार ऐसे केश हैं जिसमें पीड़ितों ने बताया कि उनके रिश्तेदार बताकर अज्ञात नंबर से फोन आया। बताया कि वह कहीं फंसे हैं और नेटवर्क की समस्या है। इस कारण रुपये उनके मोबाइल पर ट्रांसफर हुए हैं। इसका एक डमी मैसेज भेज विश्वास में लेते हैं। फिर कहते हैं कि 20 हजार भेजे हैं अभी 15 हजार उनके खाते में डाल दे बाद में पांच देना। बस इसी लालच में पीड़ित आकर शिकार बनता है। ऐसे चार लोगों से लगभग दो लाख रुपये लौटाए गए।
इसी प्रकार शहर के सीआईसी रोड निवासी व्यापारी अरकेश श्रीवास्तव के एक लाख रुपये, विजय सिंह के कार्ड से एक लाख दस हजार रुपये, पुरानी बाजार निवासी अंजनी सोनी के 40 हजार, सुरेश अग्रवाल के 15 हजार रुपये व डॉ. सादाब हुसैन के 35 हजार रुपये की ठगी की रिपोर्ट दर्ज थी। इन सभी के रुपये दिलाने के लिए साइबर क्राइम की टीम ने एक माह तक मशक्कत कर सफलता पाई है।
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जरा सी असावधानी होने पर होते ठगी का शिकार
चित्रकूट। साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह ने बताया कि वर्तमान में बैंक आने जाने वाले बैंकिंग औपचारिकताओं में नष्ट होने वाले समय से बचने के लिए भारत सरकार के डिजिटल लेन देने को प्रोत्साहित कर रही है। इस कार्य में जरा सी असावधानी होने पर कई लोग साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं। इससे बचने के लिए साइबर सेल द्वारा लगातार जागरूक किया जा रहा है। बैंकों के अपराधियों से मिलकर भी कार्य किया जा रहा है। ताकि बैंक उपभोक्ताओं को साइबर अपराध से बचाया जा सके। संवाद