चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोभूमि को आध्यात्मिक रूप से सजाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत बेड़ी पुलिया चौराहे से शंख चौराहे तक करीब तीन किमी लंबे डिवाइडर पर प्रभु श्रीराम के पदचिन्ह बनाए जाएंगे। इन पदचिन्हों को प्राकृतिक व कृत्रिम घास से सजाया जाएगा, जिस पर पांच करोड़ रुपये व्यय होंगे। यह परियोजना श्रद्धालुओं को धार्मिक परिवेश का अहसास कराएगी।
झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर बेड़ी पुलिया चौराहा से रामघाट को जाने वाले रास्ते पर यह डिवाइडर स्थित है। वर्तमान में इस डिवाइडर पर पेड़ और फूल के पौधे लगे हैं, लेकिन अब इसे और संवारा जाएगा। चित्रकूट विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण लंबे समय से धर्मनगरी को आध्यात्मिक रूप से सजाने में जुटा है। इसी कवायद के तहत श्रीराम के पदचिन्हों की लैंड स्केपिंग की कार्ययोजना तैयार की गई है।
पूरे डिवाइडर को फूलों से भी सजाया जाएगा। इससे धर्मनगरी आने वाले श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम की नगरी में आने का अहसास होगा। वे पदचिन्हों को प्रणाम कर मंदाकिनी नदी में रामघाट में स्नान कर कामदगिरि की परिक्रमा लगाएंगे। परियोजना के लिए पहली किस्त के रूप में 2.5 करोड़ रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं, जिससे निर्माण जल्द शुरू होगा।
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धर्मनगरी में बढ़ेगी श्रद्धालुओं की संख्या
चित्रकूट एक प्रमुख धर्मनगरी है, जहां साल भर लाखों श्रद्धालु आते हैं। अमावस्या, रामनवमी, दीपावली और माघ माह में यहां मेले जैसा माहौल रहता है। श्रद्धालु मंदाकिनी में डुबकी लगाकर भगवान कामतानाथ के दर्शन और कामदगिरि की परिक्रमा करते हैं। यह परियोजना रामघाट और भगवान कामतानाथ के परिक्रमा मार्ग को धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व प्रदान करेगी।
धार्मिक व पर्यटन स्थलों को नई पहचान
सती अनुसूइया, गुप्ता गोदावरी, हनुमान धारा और मड़फा किला जैसे कई अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थल हैं। धारकुंडी आश्रम, तुलसी जल प्रपात और रानीपुर टाइगर रिजर्व भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन स्थानों पर भी लोग घूमने आते रहते हैं, जिससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। यह नई पहल चित्रकूट की धार्मिक पहचान को और मजबूत करेगी।
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बोले जिम्मेदार
प्रभु श्रीराम की तपोभूमि को सुंदर बनाने की योजनाएं तैयार की जा रही हैं। बेड़ी पुलिया से शंख चौराहा तक भगवान श्रीराम के पदचिन्हों की डिवाइडर पर लैंड स्केपिंग होगी। - पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी