चित्रकूट। खोही में मंदाकिनी नदी का पानी रामघाट के दुकानदारों के लिए मुसीबत बन गया है। मंगलवार की बाढ़ में लाखों का सामान गंवाने के बाद बुधवार को फिर जलस्तर बढ़ गया। इससे व्यापारियों को तीसरी बार अपनी दुकानें खाली करनी पड़ी हैं।
दुकानों के आसपास पानी पहुंचते ही व्यापारियों ने बचा सामान सुरक्षित जगह पहुंचाया। पिछली बाढ़ के बाद पानी उतरने पर उन्होंने सामान दोबारा दुकानों में रख दिया था। बुधवार को फिर पानी बढ़ने से उन्हें सामान निकालने की नौबत आ गई। कई दवा दुकानों की दवाएं और वस्त्र की दुकानों के कपड़े व पैंट बर्बाद हो गए। दुकानदारों के अनुसार, लगातार तीसरी बाढ़ से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
रामघाट के दुकानदार दीनानाथ, कैलाश चंद्र और जगमोहन प्रसाद ने बताया कि हालात सामान्य होने पर ही दुकानें दोबारा खुलेंगी। मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से तटवर्ती और निचले इलाकों में भी पानी बढ़ रहा है। धारकुंडी आश्रम के पास बना नाला भी उफान पर है, जिससे खतरा बढ़ गया है।
प्रभावित लोगों की मदद के लिए सद्गुरु सेवा समिति ने राहत सामग्री बांटी। समिति के कार्यकर्ताओं ने प्रभावित लोगों तक जरूरी सामग्री पहुंचाई। क्योटरा और लुसरिया गांव में क्षतिग्रस्त आवासों के पीड़ित परिवारों को भी सहायता मिली। वार्ड पार्षद छोटू निषाद की मौजूदगी में सूखा राशन और तिरपाल का वितरण किया गया।
पुलिस विभाग के अधिकारी राजेश सिंह बंजारे ने टूटे पुल का निरीक्षण किया। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। तेज बारिश के बीच एक व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर उप जिलाधिकारी ने तत्काल चिकित्सा दल भेजा।
जलस्तर और बढ़ा तो हजारों की रोजी-रोटी पर संकट
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी का जलस्तर लगातार खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। अगर पानी और बढ़ा तो रामघाट किनारे बने मंदिर डूब जाएंगे और दुकानें भी नहीं बचेंगी।
फिलहाल बाढ़ से रामघाट का कारोबार पूरी तरह ठप पड़ा है।जलस्तर बढ़ने से पर्यटक नहीं आ रहे हैं, जिससे घाट और आसपास के 50 से अधिक होटलों का कारोबार भी बंद है। इससे 1,000 से अधिक लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
दुकानदार लगातार आई बाढ़ से पहले ही नुकसान झेल चुके हैं, दोबारा जलस्तर बढ़ने की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। मंदाकिनी पर करीब 500 नाविक परिवार निर्भर हैं। नाव संचालन बंद होने से उनके सामने भी आर्थिक संकट गहरा सकता है।
उधर, सतना जिले में बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए टमस जलाशय के 12 गेट खोल दिए गए हैं। वहां से करीब 10,338 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। मंदाकिनी में पहले से बाढ़ के हालात के बीच इससे निचले इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
02 सीकेटीपी-18-रामघाट क्षेत्र में दुकान व मकान का सामान लेकर जाते स्थानीय निवासी। संवाद