चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में पिछले साल आई बाढ़ की चपेट में करीब एक दर्जन से अधिक गांव आए थे। इसमें से हजारों लोग प्रभावित होते हैं। नदी किनारे गांवों में कटान भी हुआ था। ग्रामीणों ने कटान रोकने को लेकर जल शक्ति मंत्री को ज्ञापन भी दिया था। इस बार फिर बाढ़ से बचाव को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
वर्ष 2025 में 12 जुलाई से 17 जुलाई तक के बीच में कई बार तेजी से बाढ़ आई थी। इससे काफी नुकसान हुआ था। वहीं रामघाट में एक दुकान का सामान हटाते समय एक दुकानदार की पानी में डूब कर मौत हो गई थी। साथ ही दुकानदारों का सामान भी बेकार हो गया था। कई बकरियों की डूब कर मौत हो गई थी। इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्र के अरछा बरेठी गांव में बाढ़ की वजह से गांव किनारे कटान हो गया था। इसके बाद भी बाढ़ से बचाव व सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी रहे। जिम्मेदारों ने बाढ़ कंट्रोल रूम व बाढ़ चौकियां जरूर स्थापित की थी। जो लोगों को राहत देने में कारगर साबित नहीं हो सकी। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ा था।
बाढ़ से बचाव व सुरक्षा के लिए बैठकों का दौर शुरू बारिश के दिनों में मंदाकिनी नदी में आने वाली बाढ़ को लेकर जिम्मेदारों ने बैठकें शुरू कर दी है। एक सप्ताह पहले जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने पशु पालन, कृषि, राजस्व, लघु सिंचाई सहित अन्य विभागों के साथ बैठक हुई है। इसमें बाढ़ चौकियां खोलने, कंट्रोल रूम बनाने, गोताखोर व नावों की स्थितियों के बारे में जानकारी की गई है। अब अगली बैठक में जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। बाढ़ कंट्रोल रूम में 24 घंटे कर्मचारी तैनात रहता है।
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रामघाट में बना बाढ़ नापने का मीटर मंदाकिनी नदी में आने वाली बाढ़ की माप के लिए रामघाट पर मीटर बनाया गया है। इसमें पिछले साल 131.500 मीटर अधिकतम बाढ़ आई थी। जबकि 134.500 मीटर सबसे अधिक मीटर की गेज बना है। 15 जून से 15 अक्टूबर तक कभी भी बाढ़ आ सकती है।
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अरछा बरेठी निवासी शंकर प्रसाद यादव ने बाढ़ के समय होने वाली कटान को रोकने के लिए जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को ज्ञापन दिया था। इस पर मंत्री ने लघु सिंचाई विभाग को कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे।
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बोले जिम्मेदार बाढ़ से बचाव व सुरक्षा के लिए बाढ़ कंट्रोल रूम, बाढ़ चौकियां बनाई जाती है। साथ ही गोताखोर व नाव भी तैयार रखी जाती हैं। इससे जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद की जा सके।- चंद्रशेखर, एडीएम।