ओलावृष्टि और बारिश के चलते रबी और खरीफ की फसलें बर्बाद होने के बाद किसान जायद की फसल से नुकसान की भरपाई की उम्मीद लगाए हैं। लेकिन उनकी राह में अभी कई कांटे हैं। गर्मी में जायद की फसल को पानी की जबर्दस्त जरूरत होगी पर नहरों की हालत देखकर ऐसा नहीं लगता कि ये पूरी हो पाएगी। नहरों में गंदगी है और जिम्मेदार अधिकारी रोस्टर बदलने को तैयार नहीं है। किसानों ने समय रहते नहर की सफाई की मांग की है।
राजापुर पंप कैनाल की स्थिति देखकर किसानों की पीड़ा समझी जा सकती है। नहर से लगभग पचीस गांवों की सिंंचाई का लक्ष्य है। किसानों ने आरोप लगाया कि सफाई के नाम पर हर साल लाखों के वारे-न्यारे होते हैं पर टेल के गांवों तक शायद ही कभी पानी पहुंचा हो। राजापुर की मुख्य शाखा के अलावा इससे पश्चिमी और दक्षिणी शाखाएं निकली हैं, जो लगभग बारह किमी लंबी हैं। पश्चिमी शाखा में टेल के गांव भटरी और दक्षिणी शाखा में नादिन कुर्मियान के लोगों ने इस नहर से सिंचाई का आसरा ही छोड़ दिया है।
दक्षिणी शाखा में खटवारा, चनहट, मझगांव, राजापुर, पराको के अलावा पश्चिमी शाखा में चिल्लीराकस, बेराउर, रायपुर, उद्घटा, कुसेली, महुवागांव आदि गांवों की सिंचाई इस नहर से होती है। किसानाें ने बताया कि पश्चिमी शाखा में बेराउर और दक्षिणी शाखा में खटवारा के आगे शायद ही कभी पानी गया हो।
समय से पहले सफाई की जरूरत
किसान नत्थू प्रसाद पांडे, सत्येंद्र कुमार, बबली सिंह, कमलेश कुमार, रामचंद्र आदि ने कहा कि खरीफ और रबी के बाद अब जायद से ही आसरा है। अगर समय से नहर की सफाई करा दी जाए तो किसानों को जायद की फसल में फायदा होगा। इसमें अब ज्यादा समय नहीं है। अभी से नहरों की सफाई हो जाएगी तो समय रहते मूंग आदि दलहनी फसलों की तरी हो जाएगी।
सितंबर से पूर्व रोस्टर नहीं
लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता गंगाराम ने बताया कि साल में एक बार ही सितंबर-अक्तूबर में नहर की सफाई की जाती है। इसके पहले सिल्ट सफाई का रोस्टर नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर बिजली भरपूर मिली तो नहर बंद न होने दी जाएगी।