फोटो- 15- लालापुर मंदिर में लगे मेले के दौरान देवी जी के दर्शन करने को मंदिर की सीढ़ियों पर मौजूद भक्
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भौरी। माघ माह मेें प्रतिवर्ष की भाति इस वर्ष भी लालापुर गांव स्थित प्राचीन वाल्मीकि आश्रम मेें मेला लगा। यह मेला सोमवार को लगता है। इसमें अंतिम सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित मंदिर में आस-पास के दो दर्जन से अधिक गांव के हजारों श्रद्धालुओं ने मां आशवर देवी के दर्शन करने के लिए पहुंचे। मेला स्थल पर दुकानें भी लगी है। जगह जगह भंडारों का आयोजन भी हुआ। जिसमें महिलाएं खरीददारी कर रही है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस फोर्स तैनात रही। भीड़ इस कदर रही कि रैपुरा थाने की पुलिस टीम को कई बार डंडे फटकार कर भक्तों की भीड को इधर उधर करना पड़ा। मंदिर में महिला पुलिसकर्मियों को भक्तों को नियंत्रित करने में सर्दी में पसीने छूटते रहे।
माघ माह में प्रति वर्ष की तरह इस साल भी वाल्मीकि आश्रम में मेला लगा है। इसमेें अंतिम सोमवार को जिला सहित प्रयागराज, कौशाबी, मप्र के रीवा, सतना आदि जिलों से प्रतिदिन हजारों भक्त पहुुंचे, जिसमें महिलाओं की संख्या अधिक रही। जो प्राचीन वाल्मीकि आश्रम में स्थित मां अशवर देवी के दर्शन किया। मेला स्थल पर जगह- जगह दुकाने खुली हुई है। जिसमें श्रद्धालु खरीददारी किया।।मेला क्षेत्र की व्यवस्था के लिए रैपुरा थानाध्यक्ष सुरेश कुमार के नेतृत्व मेें पुलिस टीम लगी रही।
महार्षि वाल्मीकि ने स्थापित किया आश्रम
भौरी। प्राचीन आश्रम वाल्मीकि आश्रम के महंत भरतदास ने बताया कि यह आश्रम महार्षि वाल्मीकि ने स्थापित किया था। इसी स्थल पर माता सीता व उनके पुत्र लव व कुश कई साल तक रहे। वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण भी इसी आश्रम से लिखी। इस स्थान पर माघ माह में मेला लगता है। इसके अलावा नवरात्रि पर भी मेला लगता है। इस मंदिर की मान्यता है कि मां अशावर देवी के दर्शन से नेत्ररोगों संबधी विकारों में आराम मिलता है।
बालिका घायल
भौरी। वाल्मीकि आश्रम में कन्या भोज कराने आये एक परिवार की बालिका दीपिका पुत्र धीरज सोनकार खटकाना मोहल्ला राजापुर मेला स्थल सड़क पार करते समय अज्ञात वाहन से टकरा जाने से घायल हो गई। जिसको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।