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Chitrakoot News: जंगलों से सटे गांवों में बिजली-पानी का संकट

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मानिकपुर/बरगढ़/खोही। जंगलों से सटे ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीणों का पीछा नहीं छूट रहा। कहीं केबल जलने तो कहीं ट्रांसफार्मर फूंकने की वजह से गर्मी में ग्रामीण परेशान हैं। इससे क्षेत्र में लगातार पेयजल का संकट भी बरकरार है।
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भीषण गर्मी में मानिकपुर क्षेत्र के जंगली इलाके से सटे लगभग 20 गांवों में बिजली की कटौती ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। बिजली की आंख-मिचौली से रातों की नींद हराम है। मानिकपुर क्षेत्र के टिकरिया, गिदुरहा, रानीपुर, किहुनिया, डोडा माफी, हल्दीडांडी, रामपुर, कल्याणगढ़, कोटा कैंदाला, चूल्ही, अगरहुणा, देशाह, माराचंद्रा के ग्रामीणों की माने तो उनके गांवों मेें बिजली की कटौती हो रही है।
टिकरिया गांव के श्याम लाल ने बताया कि पांच से सात घंटे बिजली की आपूर्ति बंद रहती है। गिदुरहा गांव के रोहित तिवारी ने बताया कि बिजली आने व जाने का कोई समय नहीं है। कैंदाला गांव के सूरज प्रसाद ने बताया कि दो दिन पहले आंधी आने से बिजली की तार टूट गए थे। चार घंटे से अधिक बिजली की आपूर्ति बंद थी। बिजली कटौती से नलकूप भी नहीं चल पाते। इससे पानी की सप्लाई बाधित रहती है। बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता दीपक कुमार सिंह ने बताया कि बिजली की व्यवस्था सुधार ली गई है। यदि ट्रांसफार्मर व केबल में फाल्ट होता है तो तत्काल सुधार दिया जाता है।
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इनसेट
शहर में दिखा असर
शहर में बिजली-पानी की समस्या में कुछ सुधार दिखाई दिया है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद विभागीय अधिकारियों ने बिजली व पानी की आपूर्ति सही कराने के प्रयास किये। इसका प्रभाव यह रहा कि पसियाना, पुरानी बाजार व शंकर बाजार में रात व दोपहर को बिजली गुल नहीं हुई है। संवाद
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