अंतरजनपदीय शिक्षकों को प्रमोशन प्रक्रिया में शामिल करने को लेकर शिक्षक दो धड़ों में बंटते दिख रहे हैं। जहां अंतरजनपदीय स्थानातंरण से आए शिक्षक प्रथम नियुक्ति के आधार पर ही प्रमोशन की मांग पर अड़े हैं। वहीं अन्य शिक्षकों का कहना है कि जिले में प्रथम नियुक्ति के आधार पर पदोन्नति की सूची बननी चाहिए। इस संदर्भ में रविवार को दोनों पक्षों ने बैठक कर अग्रिम रणनीति बनाई।
यूआरसी में हुई बैठक में नवगठित अंतरजनपदीय बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश पांडे ने कहा कि कोर्ट ने हम लोगों को प्रथम नियुक्ति के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश दिए हैं। लेकिन इसका अनुपालन किसी जिले में नहीं किया जा रहा।
इसके लिए ही प्रदेश स्तरीय संगठन बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रदेश के सभी मंडलों में बैठक कर संगठन का विस्तार किया जाएगा। जब तक पदोन्नति नहीं मिलेगी, संघर्ष जारी रहेगा। बैठक में शिक्षक रामभूषण पांडे ने कहा कि जिले से शुरू हुई लड़ाई पूरे प्रदेश में फैल चुकी है। मौके पर कुशल सिंह, लवलेश कुशवाहा, जितेंद्र सिंह, धर्मेंद्र विश्वकर्मा, राधेश्याम पटेल, राजाराम सिंह, मनोज कुमार सोनी, प्रमोद शुक्ला आदि मौजूद रहे। संचालन आनंद यादव ने किया।
उधर जिले के प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापकों ने बैठक कर वरिष्ठता और पदोन्नति पर चर्चा की। इसमें हेमराज गर्ग ने बताया कि कुछ दिन पहले बीएसए कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन के दौरान बीएसए ने झूठा आश्वासन दिया था। बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली 1981 के आदेश/ नियमों के अनुसार ऐसा नहीं हो सकता।
इसकी धारा 21 और 22 में स्पष्ट लिखा है कि जिले में प्रथम नियुक्ति के आधार पर ही वरिष्ठता का निर्धारण किया जाए। बैठक में तय किया गया कि 9 फरवरी की शाम पांच बजे सभी लोग इस संबंध में बीएसए से मिलकर वार्ता कर ज्ञापन भी देंगे। बैठक में मानवेंद्र मिश्र, दिनेश कुमार, ब्रह्मादीन मिश्र, कमलेश यादव, ब्रजेश झा, राजकुमार, सुरेश चंद्र द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
प्रमुख सचिव से गाइड लाइन मांगी
जब पदोन्नति के संबंध में बीएसए वीके सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि शासनादेश के मुताबिक अगर कोई शिक्षक या कर्मचारी स्वेच्छा से गैर जनपद में स्थानांतरण लेता है तो उसका प्रमोशन उस जिले में उसकी वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा, प्रथम नियुक्ति के आधार पर नहीं।
अगर सरकार द्वारा उसका स्थानांतरण किया जाता है तो वहां की ज्वाइनिंग डेट से उसकी वरीयता मानी जाएगी। उन्होंने बताया कि हालांकि इस मुद्दे को लेकर कुछ लोग कोर्ट गए थे। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों से स्वविवेक का इस्तेमाल करने को कहा है। बताया कि अब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने प्रमुख सचिव से इस संबंध में गाइड लाइन मांगी है।