चित्रकूट/मानिकपुर। जिले में बारिश, तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि होने से जिला मुख्यालय से सटे गांवों व ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। गेहूं समेत दहहन, तिलहन की फसलें खेतों में बिछ गईं। ओलों की मार से सरसों के फूल भी झड़ गए। सबसे अधिक नुकसान भरतकूप व मानिकपुर क्षेत्र के गांवों में फसलों को हुआ है। कृषि विभाग ओलावृष्टि वाले गांवों का सर्वे करा रहा है।
जिले में सोमवार की देर रात तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हुई। मंगलवार की सुबह तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। कुल 60 मिमी मीटर बारिश हुई है। जिसमें सबसे अधिक मऊ क्षेत्र में हुई है। देर रात ही ओलावृष्टि शुरू हो गई। जिसमें भरतकूप क्षेत्र सहित जिला मुख्यालय के आसपास के गांव सहित अन्य स्थानों पर ओलावृष्टि हुई। मानिकपुर क्षेत्र के भी कुछ गांवों में ओलावृष्टि हुुई। तेज हवा चलने से गेहूं की फसल गिर गई, जबकि चना, मसूर, मटर सहित अन्य फसलों को नुकसान हुआ है। बारिश होने से शहर सहित गांवों की गलियों व में पानी भर गया। इससे आवागमन करने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
ये गांव सर्वाधिक प्रभावित
ओलावृष्टि भरतकूप क्षेत्र के रौली कल्याणपुर, पतौड़ा, सुदिनपुर, गोंड़ा, रसिन में हुई। वहीं मानिकपुर क्षेत्र के ऊंचाडीह, चुरेह केशरुवा सहित यूपी एपमी बार्डर में ओलावृष्टि अधिक हुई है। इससे खेतों में लगी, चना, गेहूं, मटर, अलसी, सरसों, अरहर की फसलें नष्ट हो गई हैं। जिला मुख्यालय के पास स्थित खोही सोनेपुर, कालूपुर, चितरागोकुलपुर, कसहाई, सपहा, बनकट आदि गांवों में ओलावृष्टि हुई।
किसानों को मिले आर्थिक मदद
चित्रकूट। किसान धर्मेेंद्र कुमार सिंह, ओमकार सिंह, राजन तिवारी ने बताया कि ओलावृष्टि के साथ तेज बारिश व हवा चलने से फसलों को नुकसान हुआ है। जिसमें चना, मटर, सरसों को अधिक नुकसान हुआ है। किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए।
भरतकूप क्षेत्र में 20 प्रतिशत से अधिक नुकसान
ओलावृष्टि होने से भरतकूप क्षेत्र के लगभग पांच से सात गांवों में 20 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। जिन स्थानों पर ओलावृष्टि हुई है। उन स्थानों का सर्वे कराया जा रहा है। बारिश से फसलों को नुकसान नहीं है। बताया कि सोमवार की रात 60 मिलीमीटर बारिश हुई है। जिसमें मऊ व मानिकपुर तहसील में अधिक बारिश हुई है।
आरपी शुक्ला, उप कृषि निदेशक राजकुमार व जिला कृषि अधिकारी
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