भगवान राम की तपोभूमि में 44वें राष्ट्रीय रामायण मेला महोत्सव वैदिक पूजन व संतों की शोभायात्रा के साथ शुरु हुआ। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महन्त नरेन्द्र गिरि महाराज ने कहा कि यह पावन धरती जीवन में परिवार के प्रेम बढ़ाने का संदेश देती है।
मुख्यालय के राष्ट्रीय रामायण मेला प्रेक्षागृह में मंगलवार को दीप प्रज्जवलित कर रामायण मेला का शुभारम्भ करते हुए नरेन्द्र गिरि महाराज ने तुलसी व बाल्मीकि रामायण की तुलना करते हुये कहा कि रामचरित मानस शिक्षित और अनपढ़ सब के लिये लिखी गयी है जबकि बाल्मीकि रामायण विद्वानों के लिये लिखी गयी है। चित्रकूट की धरती से भरत राम की खड़ाऊं लेकर अयोध्या गये थे यहां की धरती प्रेम, भक्ति और तप सिखाती है। कहा कि रामचरित मानस की चौपाई को गृहस्थ अपने जीवन में उतार लें तो किसी भी न्यायालय की आवश्यकता नहीं होगी।
विवाहिताओं को शिक्षा देते हुये बताया कि ससुराल जाते समय रामचरित मानस का गुटका लेकर जायें व उसे पड़कर उसका अनुकरण अपने जीवन में उतारे तो उसके ससुराली लोग उसे अपनी बेटी समान व्यवहार करेंगे और कभी कोई विवाद की स्थिति नहीं पैदा होगी। उन्होंने राजनीतिज्ञों व राजनीति पर धर्म का अंकुश होना आवश्यक बताया राजनीति में धर्मरूपी गुरू आवश्यक है। महाराज ने उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को बनाए जाने पर खुशी जताई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय उज्जैन के पूर्व कुलपति प्रो0 मिथिला प्रसाद त्रिपाठी ने की । डा. करूणा शंकर द्विवेदी रामायण मेले के महत्व समझाते हुए कहा कि रामायण मेला रस बोध को प्रचारित करने का एक प्रमुख उदाहरण है। संचालन डा. चन्द्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने किया।
इस मौके पर मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया, चित्रकूट नगर पालिका अध्यक्ष नीलम करवरिया, नगर पंचायत पंचायत अध्यक्ष चित्रकूट मप्र प्राची हेमराज चतुर्वेदी नन्हें राजा, प्रदेश के पूर्व कबीना मंत्री जमुना प्रसाद बोस, हरिवंशपाण्डेय, डा. सभापति मिश्र, डा. हरिप्रसाद दुबे फैजाबाद, डा. सीताराम सिंह विश्वबन्धु प्रयाग, डा. सरोज गुप्ता आगरा, डा. मोहन दुकुन सिलीगुड़ी,मेले के कार्यकारी अध्यक्ष, राजा बाबू पाण्डेय, सुशील द्विवेदी, डा. घनश्यामअवस्थी, भालेन्द्र सिंह एडवोकेट, प्रद्युम्न दुबे लालू भईयाकलीमुद्दीन वेग, यूसुफ खॉ, रामप्रकाश श्रीवास्तव प्रिन्स करवरया, सोनू मिश्रा आदि मौजूद रहे।