चित्रकूट। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन माता अंबे के दूसरे स्वरूप ब्रहृाचारिणी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त दर्शन क रने को देवी पंडालों में पहुंचे। शहर के काली देवी के मंदिरों में भी महिलाओं ने विधि विधान से पूजनपाठ किया।
शुक्रवार को शहर,कस्बों व ग्रामीण इलाके में देवी पंडालों में माता अंबे के दर्शन करने के लिए भक्त पहुंचे। दूसरे दिन कमेटी के सदस्यों ने पंडाल के आसपास के क्षेत्र की बिजली के उपकरणों से सजावट कराई। जिले के मानिकपुर, राजापुर,पहाड़ी, भरतकूप,शिवरामपुर आदि क्षेत्र में माता अंबे के दूसरे स्वरूप ब्रहाचारिणी के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे। शहर के तरौंहा मोहल्ले के प्रसिद्ध झारखंडी देवी मंदिर में नवरात्रि लगते ही भक्तों की भीड़ होने लगी है। मान्यता के अनुसार माता झारखंडी की स्थापना सुरर्खी वंश के राजाओं ने सन 1514 में किला का निर्माण कराया था । तभी यहां माता झारखंडी की स्थापना की थी।
ब्रहृाचारिणी के दर्शन से भक्तों को मिलता आनंद
चित्रकूट। भागवत पीठ के कथाव्यास नवलेश दीक्षित ने बताया कि मां दुर्गा के नौ शक्तियों में से दूसरा स्वरूप ब्रहृाचारणी का है। ब्रहृा शब्द का अर्थ है तपस्या से है। जिससे ब्रहृाचारणी का अर्थ हुआ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। इसका स्वरूप पूर्ण रूप से ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके बाएं हाथ में कमंडल और दाएं हाथ में जप की माला रहती है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को आनंद प्रदान करने वाला है।