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बुंदेलियों के दिलों में बसे देशराज पटेरिया

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फोटो-10- चित्रकूट महोत्सव में मंच से प्रस्तुति देते बुंदेलखंड के प्रसिद्घ गायक देशराज पटेरिया- फा? - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। बुंदेलखंडी गायक देशराज पटैरिया के निधन से जिले के निवासियों में भी गहरा शोक है। यहां उनके लोकगीत इतने लोकप्रिय हैं कि लोग उन्हें बुंदेलखंड के मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और मुकेश कहते हैं। जिले में 30 से अधिक कार्यक्रमों में वो शिरकत कर चुके हैं।
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उनका पहला कार्यक्रम 1990 में शहर के गल्लामंडी में एक संस्था ने कराया था। इसमें एक दिन पहले से ही टिकट की बुकिंग हो गई थी। भीड़ इतनी थी कि पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा था। रामायण मेला, छत्रपति शाहू जी की जयंती पर रगौली इंटर कालेज में उनके कार्यक्रम होते थे।
पटैरिया धर्म नगरी के संताें के बीच भी खासे लोकप्रिय थे। मठ-मंदिरों में होने वाले कार्यक्रम में उन्हें बुलाया जाता था। जानकी कुंड स्थित रघुवीर मंदिर, प्रमुख द्वार कामदगिरी परिसर मेें भी कई कार्यक्रम उन्होंने प्र्रस्तुत किए थे।
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महंत दिव्य जीवनदास, संत नवलेश दीक्षित, संत सीता शरण दास ने बताया कि देशराज पटैरिया के सोने की लंका बतायो हनुमान कैसे जली, चलो गोरी साइकिल में बैठकर मेला, उठो धना अंगने में बोल गो कौवा, किसान की लली चली खेत, नई दुल्हन सज गई ऐन घुंघटा उनके लोकप्रिय गीत थे।
राजनीतिक दलों के नेताओं ने जताया दुख
चित्रकूट। उनके निधन पर सांसद आर के सिंह पटेल, पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल, भैरों प्रसाद मिश्र, पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल, पूर्व विधायक चंद्रभान सिंह पटेल, पूर्व विधायक दिनेश मिश्र, रामायण मेला समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश करवरिया, बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने शोक जताया है।

फोटो-11- चित्रकूट में 12 मार्च 2018 को सिरावल गांव में एक शादी समारोह में शिरकत करने के दौरान सबसे मिलते - फोटो : CHITRAKUTT

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