आरोग्यधाम में जैव तकनीकी एवं हर्बल प्रोडक्ट में चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। जिसमें कई वैज्ञानिकों के साथ विज्ञान क्षेत्र में काम करने वालों ने सूचना एवं तकनीकी पर ज्यादा जोर देने को कहा। बोले, हर्बल दवाइयों से कई रोगों का इलाज किया जा रहा है। लोगों का तेजी से इसकी ओर रुझान तो बढ़ा ही है मांग भी बढ़ रही है। आने वाले समय इसकी मांग और तेजी से बढ़ने वाली है।
दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम स्थित सभागार में मंगलवार को मुख्य अतिथि नेशनल एकेडमी आफ साइंस इंडिया के कार्यकारी सचिव डा. नीरज कुमार ने कहा कि 21वीं सदी वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी की है। जिसे देश के लोग विभिन्न रूपों में जैसे जैव, हर्बल और सूचना तकनीकी के रूप में पढ़ते और उपयोग भी करते हैं। हर्बल तकनीकी के अंतर्गत वनस्पति उत्पादों में मूल्य वृद्धि की जाती है।
वनस्पति विज्ञान विद्यालय सतना की विभागाध्यक्ष डा. रश्मी सिंह ने बताया कि 21वीं सदी की सबसे शक्तिशाली तकनीकी जैव तकनीकी है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. डा. केपी सिंह ने कहा कि विभिन्न प्रकार की हर्बल मेडिसिन बनाई गई हैं। जिनके द्वारा अलग-अलग प्रकार के रोगों का इलाज कर सकते हैं।
आज हर्बल दवाइयों की मांग तेजी से बढ़ है। आने वाले समय में इसमें और विस्तार होगा। कार्यक्रम के अध्यक्ष डा. रामलखन सिंह सिकरवार ने बताया कि हर्बल औषधियों एवं जैव तकनीकी में आज बहुत चुनौतियां हैं। इस सम्मेलन में प्रमुख रूप से डा. मनोज त्रिपाठी, डा. अर्चना निगम, डा. राजेश गर्ग, डा. सुनीता र्स्वणकार, भुवनचंद्र जोशी, डा. निलेश द्विवेदी, के अलावा महाविद्यालय के प्राध्यापक, डा. अनिल जायसवाल, डा. विजय प्रताप सिंह, सिवेश प्रताप सिंह, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।