फोटो 28सीकेटीपी 02 बाजार में हर्बल रंग बेचता दुकानदार। संवाद
चित्रकूट। होली के रंगों में हर्बल गुलाल ने अपनी जगह बना ली है। लोग केमिकल रंगों से होने वाले नुकसान के कारण प्राकृतिक वस्तुओं से बने हुए हर्बल गुलाल का प्रयोग करेंगे। गेंदा और गुलाब के फूलों से बनने वाले गुलाल से त्वचा को कोई नुकसान भी नहीं होगा। बाजार में इस समय दुकानों पर हर्बल गुलाल की मांग सबसे अधिक है।
शहर सहित कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में रंग बेचने वाली दुकानों पर हर्बल रंगों की खूब बिक्री हो रही है। दुकानदार धीरेंद्र शर्मा और अनुभव दुबे ने बताया कि प्राकृतिक रंग सबकी पसंद बन चुके हैं। इनका आसानी से छूटना और त्वचा को नुकसान न पहुंचाना इनकी मुख्य विशेषता है। इसलिए वह हर्बल रंगों से होली खेलेंगे। राकेश अग्रवाल व शारदा अवस्थी ने बताया कि आज के दौर में जहां रासायनिक रंगों के प्रयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
प्राकृतिक रंगों का उपयोग होली खेलने के लिए अच्छा बदलाव है। होली के इस पर्व को अगर हम प्राकृतिक रंगों के साथ मनाएं तो केवल हम अपनी त्वचा और स्वास्थ्य की सुरक्षा करेंगे। पूरे वातावरण को भी सुरक्षित बनाएंगे। दुकानदार राजेश गुप्ता, प्रदीप केसरवानी ने बताया कि हर्बल रंग फूलों से बनाया जाता है। जिसमें गुलाब गेंदा, से प्राकृतिक रंग तैयार किया जाता है। इसी के साथ हल्दी से पीला रंग तैयार किया जाता है। बताया कि हर्बल रंग के पैकेट 50 ग्राम के 25 रुपये से लेकर 70 रुपये तक आते हैं। इससे बड़े पैकेट 100 रुपये लेकर दो सौ रुपये तक आते हैं।
-
रासायनिक रंगों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
जिला अस्पताल के डॉ. आरबी लाल ने बताया कि रासायनिक रंगों में अक्सर लेड, ऑक्साइड, मरकरी और अन्य हानिकारक रसायन होते हैं। ये हमारी त्वचा के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। इन रंगों के कारण त्वचा में जलन, खुजली, एलर्जी और संक्रमण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, आंखों में जलन, एलर्जी और गंभीर आंखों की समस्याएं भी हो जाती हैं।