चित्रकूट। पुलिस के लिए सिरदर्द बना डेढ़ लाख रुपये का इनामी कुख्यात डाकू गौरी यादव करीब बीस साल पहले अपराध की दुनिया में आया। शुरुआत में वह छोटी-मोटी वारदात को अंजाम देता था। वर्ष 2013 में दिल्ली पुलिस के दरोगा की हत्या के बाद वह सुर्खियों में आया। अब वह सरकारी कार्यों में कमीशन वसूलता है। उस पर यूपी और एमपी में करीब 60 मुकदमे दर्ज हैं। चित्रकूट और सतना के पुलिस अधिकारियों ने उस पर पांच लाख इनाम घोषित करने की सिफारिश की है।
चित्रकूट और आसपास के जिलों में कई दशकों से डकैतों का आतंक रहा है। ददुआ, ठोकिया, बलखड़िया, रागिया, बबली कोल और लवलेश कोल के मारे जाने के बाद अब पुलिस के सामने डाकू गौरी की चुनौती है। डाकू गोप्पा के साथ 2001 में अपराध की दुनिया में सरगना बना डकैत गौरी यादव अब सरकारी कामकाज में कमीशन न मिलने पर ठेकेदार और मजदूरों से मारपीट करता है।
वर्ष 2008 में हुई मुठभेड़ में एसटीएफ ने गौरी को पकड़कर जेल भेजा था। दो साल बाद जेल से छूटने के बाद वह फिर लूटपाट करने लगा।
डाकू गौरी यादव चित्रकूट के बहिलपुरवा थाना के बिलहरी गांव का निवासी है 16 मई सन 2013 को दिल्ली पुलिस बिलहरी गांव में दबिश देने गई थी।
गौरी यादव ने दिल्ली पुलिस के दरोगा की गोली मारकर हत्या कर सरकारी रिवाल्वर लूट ली थी। मई 2016 में बिलहरी गांव के तीन ग्रामीणों को बिजली के खंभे में बांधकर उसने गोली चलाई थी। तब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी जावेद अहमद ने गौरी यादव पर एक लाख का इनाम घोषित किया था। गौरी ने 2017 में कोल्हुआ जंगल में गांव के ही एक विरोधी को जिंदा जला दिया था।
गौरी यादव के खिलाफ चित्रकूट और सीमा से सटे सतना मध्य प्रदेश में 60 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने गौरी यादव पर 50000 का इनामी घोषित कर रखा है। एक लाख का इनाम यूपी में हैं। बताते हैं कि आतंक के बल पर गौरी यादव ने वर्ष 2016 में अपनी मां को गांव का प्रधान बनवाया था। मध्यप्रदेश के मझगवां थाने के पड़वनिया में उसकी बहन ब्याही है। अपने बहनोई को भी बंदूक के दम पर सरपंच बनवाया था। तेंदू पत्ता तोड़ान में वह भी चौथ वसूली करता है। (संवाद)
कई बार दे चुका है पुलिस को चकमा
डेढ लाख के इनामी डाकू गौरी यादव का यूपी और एमपी पुलिस से कई बार आमना-सामना हुआ, लेकिन हर बार वह चकमा देकर भाग जाता है। 30 अक्टूबर 2015 को बहिलपुरवा जंगल, 9 मई 2019 को एमपी पुलिस से बटोही के जंगल में मुठभेड़ हुई थी। इसी साल 30 मार्च को बहिलपुरवा के जंगल में यूपी पुलिस से मुठभेड हुई है, लेकिन वह भागने में कामयाब रहा।
जिस तरह अन्य डाकुओं का खात्मा किया गया है, उसी तरह गौरी गैंग को भी खत्म करने में पुलिस सक्रिय है। यूपी-एमपी की पुलिस टीम ने पंचायत चुनाव से गैंग की वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चलाया। इस चुनाव में डाकू कोई दखलंदाजी नहीं कर सका। गैंग के पांच प्रमुख मददगारों को भी पकड़ा गया है। जल्द ही इसका भी खात्मा होगा। -अंकित मित्तल, एसपी चित्रकूट।