भीषण गर्मी में कस्बे सहित आसपास के गांवों में पेयजल संकट है। पेयजल की सप्लाई नहीं होने से कस्बे वासी परेशान हैं। हैंडपंपों के साथ पानी की टंकी भी शोपीस बनी है। कारण जिस कुएं से टंकी भरी जाती थी, वह कुआं भी सूख गया है।
कस्बे की लगभग छह हजार आबादी के बीच 42 हैंडपंप लगे हैं, उनमें से ज्यादातर हैंडपंपों का पानी नीचे चला गया है। ऐसे में बहुत देर तक चलाने के बाद इनमें पानी आता है। वहीं कई हैंडपंप सही है, उन पर भीड़ लग जाने से लोगों का नंबर ही नहीं आता है। कस्बे सहित पास के मनोहरगंज में जल सप्लाई के लिए जल संस्थान की टंकी है। जिससे सप्लाई होती है, लेकिन टंकी को भरने के लिए एक ही नलकूप होने के कारण सभी जगह सप्लाई नहीं हो पाती।
टंकी को भरने के लिए पहले एक कुएं में मोटर लगाई गई थी, मगर कुआं भी सूख गया है। लोगों का मानना है कि उसमें अगर बोर करा दिया जाए तो पानी निकल आएगा। जल संस्थान के कर्मचारियों का कहना है कि टंकी पूरी भरने के बाद जब पानी छोड़ा जाता है तो वह एक घंटे से पहले ही खाली हो जाती है। जबकि टंकी को भरने में दो घंटे से ज्यादा समय लगता है। ऐसे में अकेले नलकूप के सहारे जलापूर्ति करना मुश्किल है।
कस्बे के ब्राह्मण मोहल्ला निवासी शशिकांत, शिवा ने बताया कि सुबह छह बजे से नल आने का इंतजार करने लगते हैं, मगर आपूर्ति केवल पांच से दस मिनट ही होती है। वहीं मारवाड़ी मोहल्ला निवासी शिवकन्या, रूकसाना आदि का कहना था कि एक ही हैंडपंप होने से पानी भरने का नंबर ही नहीं आता है।