अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। गुरुवार को अदालत ने हत्या के प्रयास और दलित उत्पीड़न मामले में दोषी पाए जाने पर चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। चारों को 19-19 हजार रुपये का अर्थदंड भी देय होगा।
अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट के अभियोजन अधिकारी मनमोहन वर्मा ने बताया कि 17 सितंबर 2005 को पहाड़ी थानाक्षेत्र के नांदी गांव में विवाद पर रंपुरिया निवासी धीरज सिंह पुत्र सुखलाल, तौरा निवासी हरिश्चंद्र पुत्र ननका, जितेंद्र पुत्र विमल और बद्दा पुत्र नत्थू के खिलाफ गांव के चुनकाई प्रसाद पुत्र लोभी वर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके भाई राकेश कुमार को गांव के रास्ते में गोली मारी गई थी। इसी मामले में अदालत में 12 साल से मुकदमा चल रहा था।
गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश पीके श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों की बहस व गवाहों के बयान के बाद चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। चारों को अर्थदंड भी देय होगा। इस मामले में आरोपियों को हत्या के प्रयास और दलित उत्पीड़न मामले में दोषी माना गया है। जिसे गोली लगी थी वह इलाज के बाद ठीक हो गया है।
दलित उत्पीड़न में कोर्ट ने सुनाई सजा
17 सितंबर 2005 को हुई थी घटना