ट्रेन डकैती : चार दिन बाद भी किसी ठोस नतीजे पर नही पहुंचे अधिकारी
अमर उजाला फालोअप
चित्रकूट। रविवार की रात गंगा कावेरी ट्रेन में लाखों रुपये की डकैती की घटना के चार दिन बीत गए हैं। एसटीएफ समेत जीआरपी आरपीएफ व सिविल पुलिस की पांच टीमें दिन रात खोजबीन में लगी हैं इसके बावजूद पुलिस के हाथ कुछ भी नहीं लगा है। सिर्फ दलीलें देकर अंधेरे में तीर मार रही है। यहां तक कि पुलिस अधिकारी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे तो अब यह वारदात डकैतों के नाम कर खानापूर्ति करने की फिराक में हैं।
उत्तर मध्य रेलवे के मुंबई हावड़ा रेलमार्ग पर पनहाई स्टेशन के पास रविवार की देर रात लगभग सवा एक बजे अज्ञात डकैतों ने योजनाबद्ध तरीके से सिग्नल रेड व चेन पुलिंग कर गंगा कावेरी ट्रेन की स्लीपर बोगियों में डकैती डाली थी। वारदात के बाद आरपीएफ व जीआरपी समेत भारत सरकार के रेल मंत्रालय सुरक्षा इंतजामों की पोल खुलने लगी तो आनन फानन में पुलिस ने दो दर्जन लोगाें ंको पकड़ लिया। जिनसे पूछताछ में कुछ भी हासिल नहीं हुआ। जिसमें डेढ़ दर्जन लोगों को छोड़ भी दिया है। लेकिन छह लोगाें को अभी भी थाने में बैठाए है। मानिकपुर थाना प्रभारी केपी दुबे ने बताया कि जिन लोगों को पकड़कर पूछताछ की गई है। उनमें ज्यादातर को छोड़ दिया गया है और बाकी को जीआरपी के हवाले किया गया है।
चार दिन बाद भी अभी तक पुलिस यह नहीं बता पाई कि वारदात में किस गिरोह का हाथ है। सिर्फ अंधेरे में तीर फेंके जा रहे हैं। गुरुवार को जीआरपी आईजी इलाहाबाद बीआर मीणा व एसपी पीके मिश्रा पनहाई मानिकपुर होते हुए सतना मप्र स्टेशन पहुंचे। कई घंटे तक स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज देखे जिसमें संभावना जताई गई है कि इसी स्टेशन से कई डकैत ट्रेन में सवार हुए थे। उन्होंने बताया कि अभी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। जांच जारी है।
क्यों लिया जा रहा नामी डकैतों का नाम
चित्रकूट। एक तरफ पुलिस अधिकारी कहते हैं कि ट्रेन डकैती में कुख्यात डाकू बबुली कोल गैंग का हाथ नहीं है। लेकिन संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। नए दस्यु सुंदरी साधना पटेल गैंग पर भी शक जाहिर किया। जिस पर चित्रकूट पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार झा का कहना कि गैंग का अभी मानिकपुर क्षेत्र में पहुंचने की कोई जानकारी नहीं है। इधर कोई वारदात भी इस गैंग ने नहीं की है। इसके बाद यह सवाल उठता है कि आईजी जीआरपी बीआर मीणा व एसपी पीके मिश्रा ने यह क्यों कहा कि दस्यु सुंदरी साधना पटेल या बबुली गैंग के सदस्यों पर भी शक है। इससे यह भी लगता कि चार दिन बीतने के बाद पुलिस के हाथ खाली होने पर अब यह योजना बनी है कि इस वारदात को डकैतों के नाम पर कर खानापूर्ति कर ली जाए। जांच चलती रहेगी। इससे यह भी है कि जो असली गुहनगार हैं वह बच जाएंगे।
दो स्पेशल टीमें गठित
मानिकपुर। आरपीएफ प्रभारी आेंकार नाथ त्रिपाठी ने बताया कि ट्रेन डकैती में शामिल आरोपियों की तलाश के लिए दो स्पेशल टीमें गठित की गई हैं। जो जंगल में छानबीन कर रहीं है। जीआरपी प्रभारी हरीशंकर ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ जारी है फिलहाल अभी सफलता नहीं मिली है। उधर मानिकपुर थानाध्यक्ष केपी दुबे ने पनहाई से लेकर मानिकपुर तक रेल पटरी और आसपास के जंगल में खोजबीन की। इसके बाद रेलवे स्टेशन के बाहर संदिग्धों की तलाश की।
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अवैध वेंडरों समेत पटरी किनारे बसे समुदाय की जांच पड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो
मानिकपुर। गंगा कावेरी एक्सप्रेस में लाखों की डकैती के बाद से जीआरपी व आरपीएफ ने अवैध वेंडरों पर शिकंजा कसा है। सतना से मानिकपुर और इलाहाबाद की ओर रात को चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों पर चेकिंग की जा रही है। इसके बावजूद पनहाई स्टेशन पर अस्थाई पुलिस चौकी नहीं खुली है। अमर उजाला में खबर छपने के बाद यह जरूर हुआ है कि स्टेशन पर दो पुलिसकर्मी गश्त करने जरूर पहुंचे थे।
चार दिन पूर्व ट्रेन में डकैती में मानिकपुर से लेकर डभौरा तक के बीच रेल मार्ग किनारे बसे बंजर व कंजर जाति के समुदाय पर अवैध वेंडरों से मिलकर वारदात करने का शक जताया गया है। जिसमें रेल अधिकारियों ने ट्रेन में अवैध वेंडरों के खिलाफ कड़ी जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। गुरुवार को इस रूट की ट्रेनों पर अवैध वेंडरों की जांच की गई। इसके अलावा रेल पटरी किनारे बसे उस समुदाय के लोगों के कबीले में जाकर पूछताछ की गई। उधर पनहाई रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं किए गए। अस्थाई जीआरपी की पुलिस चौकी नहीं खुली है। गुरुवार को अमर उजाला में खबर छपने के बाद मानिकपुर जीआरपी थाने से दो सिपाही सुबह शाम गश्त के लिए भेजे गए। थाना प्रभारी हरीशंकर ने बताया कि जल्द ही उस स्टेशन पर अस्थाई पुलिस चौकी खुलेगी।