एक बालू खदान के पट्टाधारक पर अकेले दो करोड़ से अधिक का जुर्माना लगना शायद पूरे बुंदेलखंड में पहला मौका है। चित्रकूट जिले में यह सबसे बड़ा जुर्माना लगाया गया है।
बुंदेलखंड में नदियों से बालू खनन व पहाड़ों से पत्थर तोड़ान पर अरबों रुपये का राजस्व मिलता है। साथ ही करोड़ों की चोरी भी होती है। इसे रोकने के लिए जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश शासन भी समय-समय पर प्रयास करता है। इसमें कई बार पट्टाधारकों पर जुर्माना भी लगा है।
जिला प्रशासन ने बुधवार को राजापुर क्षेत्र के चांदी घाट पर चल रहे बालू के पट्टे में पर्यावरण, खनिज व एनजीटी के नियमों की अनदेखी करने पर दो करोड़ पांच लाख का का जुर्माना लगाया तो सभी पट्टाधारक से लेकर जिले में चर्चा का विषय बन गया।
जिला खनिज अधिकारी मिथलेश कुमार पांडेय ने बताया कि यह चित्रकूट जिले में बालू व पत्थर खदानों में अब तक का सबसे बड़ा व ज्यादा जुर्माना है। इसके पूर्व एक साल पहले भरतकूप के पहाड़ पर पत्थर तोड़ान में नियमों का पालन न करने पर पट्टाधारक सत्यप्रकाश पर 39 लाख का जुर्माना लगाया गया था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अबकी बालू खदान पर लगाया गया जुर्माना पूरे बुंदेलखंड में किसी सी एक फर्म पर लगाए गए जुर्माने में सबसे ज्यादा है।
जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि शासन की मंशानुरूप खनन न कराने वालों पर नियमानुसार समय-समय पर कार्रवाई होती रहती है।
चांदी घाट पर कई दिनों से शिकायत पर जांच कमेटी बनाई गई थी। नदी में खुदाई के नियमों का पालन न होने की जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की गई है। इससे यह भी संदेश दिया गया है कि अवैध खनन या नियमों का पालन न करने वाले अन्य लोग भी सावधान रहें।
चोरी छिपे भी होता है अवैध खनन
जिला प्रशासन के सख्त रवैये के बाद भी जिले के कई इलाकों में चोरी छिपे अवैध खनन व परिवहन जारी है। भरतकूप, शिवरामपुर, पहाड़ी, मानिकपुर, बरगढ़ व मऊ क्षेत्र में अक्सर ऐसी शिकायतें आती हैं। कई बार तो जिला प्रशासन की टीमों ने छापेमारी कर बालू व पत्थर लदे वाहन पकड़े हैं। खासकर मऊ के यमुना नदी किनारे तो कौशांबी व प्रयागराज के पट्टाधारकों पर अवैध बालू खनन व ढुलान पर रिपोर्ट तक दर्ज कराई जा चुकी है।
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