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पांच दिन में परछाई भी नहीं ढूंढ सकी पुलिस

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समझ नहीं आ रहा बच्चों को जमीन निगल गई या आसमां
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। पांच दिन120 घंटे के बाद भी यूपी-एमपी पुलिस, एसटीएफ व गुप्तचर एजेंसी की टीम तेल उद्यमी के अपहृत दो मासूम जुड़वा बेटों की परछाई तक नहीं ढूंढ सकी है। जिससे परिजन ही नहीं अन्य वर्ग में भी आक्रोश के साथ भय का वातावरण बनता जा रहा है। अपहृत भाइयों के अन्य भाई बहनों के चेहरे पर दहशत है वह घर में ही कैद होकर रह गए हैं। सिर्फ शून्य आंखों से हर आनेजाने वालों को निहारते हैं। डकैतों से लेकर परिजनों के अन्य व्यापारिक व पारिवारिक व पड़ोसियों से रिश्तों को टटोलने के बाद कुछ हाथ नहीं लगा तो शनिवार को यूपी-एमपी के पुलिस अधिकारियों की बैठक में कई अधिकारी सिर्फ अपनी खोपड़ी ही खुजलाते रह गए। उन्हें भी यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर अपहृतों को जमीन निगल गई या आसमान खा गया। मंगलवार की दोपहर साढ़े बारह बजे सदगुरु पब्लिक स्कूल जानकीकुंड परिसर में स्कूल की बस से दो नकाबपोश बदमाशों ने रामघाट निवासी तेल उद्यमी बृजेश रावत के जुडवां पुत्र प्रियांश व श्रेयांश का तमंचे की नोंक पर अपहरण कर लिया था। शनिवार आईजी रींवा उमेश जोगा, आईजी चंचलशेखर, डीआईजी अविनाश शर्मा, एसपी संतोष गौर व अपरएसपी गौतम सोलंकी के अलावा चित्रकूटधाम मडल के डीआईजी अनिल कुमार राय, एसपी मनोज झा ने अपर एसपी बलवंत चौधरी के साथ जिले की सीमा क्षेत्र के जंगलों में अपहरणकर्ताओं की तलाश की लेकिन अभी कामयाबी नहीं मिली है। लखनऊ व जबलपुर से पहुंची एसटीएफ व गुप्तचर एजेंसी ने भी मोर्चा संभाला है। मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुलिस महानिदेशक वीके सिंह को अपहरण की गुत्थी सुलझाने के विशेष निर्देश दिए हैं लेकिन पांच दिन बीतने पर भी कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी।

डकैतों समेत कई स्थानीय नामी व्यक्तियों पर नजर
खोही। चित्रकूट के सिरसावन के पास स्थित पुलिस कार्यालय में रींवा व चित्रकूटधाम मंडल के पुलिस अधिकारियों की बैठक एक घंटे तक चली। जिसमेें हर बार इसी बात पर जांच अटकी कि आखिर अपहरण के पीछे मकसद क्या है और कौन हो सकते हैं। चित्रकूट क्षेत्र के स्थानीय कई नामी लोगों के नाम व उनके काम पर मंथन हुआ। तय हुआ कि इनकी निगरानी रखी जाएगी। डकैतों के मूवमेंट को भी इंकार नहीं किया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि अपहरणकर्ता बच्चों को डकैतों को न सौंप दें, इस पर विशेष नजर रखी जा रही है। जंगलों में पुलिस की कांबिंग जारी है। अपहृतों के पारिवारिक व रिश्तेदारों से बातचीत जारी है। बैठक के बाद पुलिस अधिकारियों ने अपहृतों के घर जाकर परिजनों से बातचीत कर जल्द दोनों बच्चों को छुड़ाकर लाने का भरोसा दिया।
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फिरौती मांगने की चर्चा पर परिजनों ने साधी चुप्पी
चित्रकूट। पांच दिन बाद भी पुलिस अपहृत जुड़वां बच्चों की खोजबीन नहीं कर पाई अब सीतापुर समेत अपहृतों के परिजनों में फिरौती मांगने को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। रामघाट व परिक्रमा मार्ग के पास ही कुछ लोगों ने दबी जुबान में कहा कि अपहरणकर्ताओं ने अपहृतों के रिश्तेदारों द्वारा मैसेज भिजवाया है। इस संबध में परिजनों के साथ पुलिस अधिकारी खामोशी ओढे़ हैं। कई बार कुरेदने पर आईजी उमेश जोगा ने बताया कि पुलिस की प्राथमिकता बच्चों को पहले सकुशल छुड़ाना है पुलिस कोई खतरा नहीं उठाना चाहती। यह बात उनके परिजनों को भी बताई गई है।
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रामघाट के आसपास दोपहर को भी सूनसान
चित्रकूट। दो मासूमों के अपहरण के बाद से इसका खुलासा न होने से अभिभावक बच्चों के अलावा अब इसका प्रभाव तीर्थक्षेत्र में भी दिखने लगा है। खासकर माघ माह में रामघाट के आसपास दोपहर को इक्का दुक्का ही तीर्थयात्री दिखते हैं। शाम को जरूर यह क्षेत्र कुछ देर के लिए गुलजार होता है लेकिन रात आठ बजे के बाद सन्नाटा हो जाता है। चारों तरफ पुलिस की मौजूदगी ही दिखती है जो आने वाले वाहनों की जांच कर रही है।
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