सावन माह के नागपंचमी के त्योहार के बाद रक्षाबंधन तक शहर में लगने वाला झांकी झूला महोत्सव आधुनिक मनोरंजन के साधनों के कारण फीका पड़ गया है। प्रमुख मंदिरों में भगवान कृष्ण की झांकी तो भव्य तरीके से सजायी जाती है। लेकिन दर्शन करने को अधिक भीड़ नहीं लगती है। इससे आयोजक भी निराश हैं।
शहर में कई साल से झांकी झूला महोत्सव सावन में मनाया जाता है। जिसमें नई बाजार, बल्दाऊ गंज व शंकर बाजार के गंगा जी रोड में स्थित मंदिरोें में भव्य सजावट करने के बाद मंदिर परिसर में झूला डाल कर भगवान कृष्ण को झूलाया जाता है।
लगभग दस साल पहले तक इन मंदिरों में सुबह, शाम भारी भीड़ होती थी। मंदिरों के बाहर रंग-बिरंगी राखियाें की दुकानें लगती थी। जिसमें दुकानदार लाउडस्पीकर लगाकर भाई बहन के प्यार के फिल्मी गाने लगाते थे । इससे महोत्सव मेें रोनक बढ़ जाती थी। जब से टेलीवीजन, मोबाइल व अन्य मनोरंजन के साधन घरों में आ गये। लोगों की रुचि कम होने लगी।
झूला महोत्सव की परंपरा को मनाएं रखने के लिए आयोजक आज भी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। आयोजकों का कहना है कि एक दिन फिर से ऐसा समय आयेगा कि लोग झूला महोत्सव में रुचि लेने लगेंगे। जबकि शहर के राजेश सिंह, रामकृष्ण तिवारी, राघव, ललिता, आदि ने बताया कि आज भी जब सावन माह आता है तो उनके मन में झूला महोत्सव की यादें ताजा हो जाता है।