फोटो- 10- घर जाकर महिलाओं को कोरोना से बचाव की जानकारी देती आशा कार्यकर्ता
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चित्रकूट। महामारी काल में आशाएं कोरोना योद्धा की भूमिका निभा रही हैं। थर्मल स्क्रीनिंग हो या सैनिटाइज कराना या देहात क्षेत्रों में संदिग्ध लोगों की सूची बनाना, इन सभी कामों को बाखूबी अंजाम दे रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना योद्धा बीमारी से निपटने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
सदर ब्लाक के गोबरिया गांव की आशा सुकन्या देवी ने बताया कि लॉडाउन के शुरू के दो चरणों में बहुत परेशानी झेलनी पड़ी। कौन बाहर से आ रहा है या गांव से कौन बाहर जा रहा है, इसकी पूरी रिपोर्ट बनानी होती थी। बाहर से आए लोगों के घरों में होम क्वारंटीन के पोस्टर घर के बाहर चिपकाते थे। शुरूआत में लोगों बर्ताव रूखा था। चिपकाए पोस्टर लोग हटा देते थे।
जब हम लोगों को कोरोना के बारे में जागरूक करते तो कई बार अपशब्द झेलने पड़ते थे। झगड़े पर उतारू लोगों को समझाने के लिए पुलिस को भी बुलाना पड़ता है। इस विपरीत स्थिति में लोगों की सेवा में हम डटे रहे।
कर्वी ब्लाक के डिलौरा गांव की आशा संगिनी रहमतुन्निशा बताती हैं कि वह सुबह 10 बजे घर से निकल जाती हैं और शाम पांच बजे घर पहुंचती हैं। घरों में जाकर लोगों को कोरोना से बचने के उपाय बताती हैं। जैसे कि 40 सेकेंट तक हाथ धोना चाहिए।
हाथ पोछने के बजाय सुखाने की कोशिश करनी चाहिए। किसी के घर का दरवाजा या कुंडी नहीं छूनी चाहिए। आवाज देकर ही उन्हें बाहर बुलाना है। वही ग्रामीणों को भी इसके लिए प्रेरित करना है कि वह गांव में किसी दूसरे व्यक्ति की कुंडी या दरवाजा को हाथ न लगाएं। ऐसा करने से कोरोना वायरस का संक्त्रस्मण फैल सकता है।
चित्रकूट। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुमार यादव ने बताया कि कोरोना को हराने में जागरुकता सबसे बड़ा हथियार है और आशा कार्यकर्ता व संगिनियाँ इसमें विशेष रूप से सहयोग कर रही हैं। वर्तमान में जनपद में 826 आशा कार्यकर्ता और 43 आशा संगिनियाँ कार्य कर रही हैं।
कोविड-19 को लेकर इन सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तथा ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है। व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए इन्हें मास्क और सैनीटाइजर भी दिया गया है।