मानव विकास संस्थान की अगुवाई में ग्रामीणों ने डीएम
को पत्र देकर तहसील मऊ में चकबंदी विभाग के जिम्मेदारों पर विकास अवरुद्ध
करने का आरोप लगाया है।
किसानों का कहना है कि पहले भी उन लोगों ने सत्याग्रह किया था पर बात आश्वासन से आगे नहीं बढ़ी।
संस्थान
अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, सत्यनारायण, छेदीलाल सिंह, राजेश कुमार सिंह,
रामलखन, इंद्रपाल सिंह, अवधेश सिंह, जितेंद्र सिंह लौरी का कहना है कि
चकबंदी के बाद गांवों में सीमा रेखा भी विवादित हो गई है।
छोटे-छोटे
चकों को मिलाकर बड़े चक बनाने का उद्देश्य अधूरा है। इनका कहना है कि
किसानों की पांच फीसदी काटी गई जमीन के एवज में जो जमीन छोड़ी गई है, वह
गांव की भूमि प्रबंधन समिति की मिलीभगत से अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी है।
गांवों
के लोग खाद-गड्ढों के अभाव में सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर
कूड़ा फेंकने को मजबूर हैं। गांव वालों का यह भी कहना है कि चकबंदी विभाग
ने गांव के भूचित्र में अचक गाटों और आबादी के नक्शों में हेराफेरी कर तनाव
बढ़ा दिया है।
अब नक्शा सुधार कराने में समय और धन की बर्बादी हो
रही है। किसानों का कहना है कि इस संबंध में कई बार तहसील दिवस में भी पत्र
दिए गए पर कोई फायदा नहीं हुआ।