आशूरा यानी दसवीं मोहर्रम को इमामबाड़ों से उठे ताजियों को दफन किया गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में इसके पहले पूरी रात मातम और रस्मी ढोल-ताशों की गूंज रही।
शनिवार को दसवीं के मौके पर देर रात तक ताजिया और सवारियां निकाली गईं। सभी इमामबाड़ों से ये ताजिये और सवारियां निर्धारित स्थानों पर पहुंचे और वहां दफन किए गए।
कोतवाल रनवीर सिंह ने बताया कि कजियाना मुहल्ले के दो ताजिए पुल घाट के पास, कजियाना का एक ताजिया और तीन उटारखाने के ताजिए राजा घाट में दफन किए गए।
इसके अलावा मन्नत के छोटे-छोटे अन्य ताजिए भी विभिन्न स्थानों पर दफन किए गए। भरतकूप में भी निर्धारित स्थान पर दफन किए गए।
बताया कि सीतापुर के दो ताजिए रविवार सुबह नदी किनारे निर्धारित स्थान पर दफन किए गए। अन्य जगहों पर भी शांतिपूर्वक माहौल में ताजियों को दफन किया गया।