महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कला संकाय एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को सामाजिक पुनर्रचना में इतिहास की भूमिका विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसमें मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विवि के कुलाधिपति पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि हिस्ट्री शब्द अंग्रेजों की मानसिकता का कालकूट है, जबकि इतिहास भारतीय संस्कृति के मंगलमय अमृत का पारितोषिक है। शाश्वत सत्य की संकल्पना ही इतिहास है।
उन्होंने कहा कि जहां हास न हो, प्रत्येक बात गंभीरता से सोची जाए वह इतिहास है। जगद्गुरु ने उपनिषद, आर्ष ग्रंथों के महत्वपूर्ण दृष्टांतों को प्रस्तुत कर धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की चर्चा की। उन्होंने रामायण तथा महाभारत की ऐतिहासिकता की तर्क सम्मत व्याख्या के लिए क्रांति करने का आह्वान किया। अध्यक्षता कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने की। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही ग्रामीण क्षेत्र विकसित होंगे।
युवाओं का स्वावलंबी होना जरूरी है। यही नानाजी देशमुख की संकल्पना थी। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संयोजक एवं मुख्य वक्ता डॉ. बाल मुकुंद पांडेय ने कहा कि हमारा लक्ष्य लोगों को इतिहास की ओर मोड़ना है। मार्गदर्शक मधु भाई कुलकर्णी एवं अध्यक्ष प्रो. सतीशचंद्र मित्तल व दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन विशिष्ट अतिथि थे। आयोजन सचिव प्रो. कपिल देव मिश्र, अधिष्ठाता कला संकाय एवं भाजपा के संगठन सचिव रत्नाकर पांडेय सहित अन्य प्रसिद्ध इतिहासविद् रहे।
इसके पूर्व अमर्त्य सेन सभागार में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना की वार्षिक साधारण सभा की बैठक हुई। जिसमें सदस्य इतिहासविद् शामिल हुए। सरस्वती वंदना और कुलगीत विश्वविद्यालय की छात्राओं ने प्रस्तुत किया। संगोष्ठी के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन मुख्य अतिथि ने किया। जनसंचार वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र कुमार व्यास ने संगोष्ठी के उद्देश्य एवं औचित्य पर प्रकाश डाला।