चित्रकूट। सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को चित्रकूट में बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा करते समय मंदाकिनी समेत सभी नदियों का कैचमेंट एरिया साफ करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने कहा था कि नदी की जमीन खाली कराओ, लेकिन लघुसिंचाई विभाग के अफसरों को कैचमेंट (सीमांकन) की जानकारी ही नहीं है। जिम्मेदारों को मंदाकिनी की चौड़ाई तक नहीं पता। उनके पास इसकी पैमाइश का कोई आंकड़ा नहीं है।
हालात यह हैं कि अतिक्रमण से मंदाकिनी 100 मीटर से सिमटकर 50 मीटर रह गई, लेकिन किसी अफसर ने लाल निशान तक नहीं लगाया। अब सीएम का आदेश आते ही जिम्मेदारों में हड़कंप है। अब अफसरों का कहना है कि घनी आबादी के कारण बाढ़ का पानी फैल नहीं पाता और बस्ती में घुस जाता है, लेकिन मंदिकनी की चौड़ाई की कभी पैमाइश नहीं हुई।
मध्य प्रदेश व पहाड़ी इलाकों में हुई तेज बारिश से धर्मनगरी में तबाही मच गई। रामघाट में दो से तीन मंजिला मकान पानी में डूब गए। घरों और दुकानों में रखा सामान खराब हो गया। घाट की सुंदरता भी उजड़ गई। बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर और टिनशेड टूट गए। कई दुकानों का सामान तेज बहाव में बह गया।
उधर, पहाड़ी क्षेत्र के परसौंजा, मकरी पहरा, अरछा बरेठी, ओरा सहित अन्य गांवों में सैकड़ों कच्चे मकान गिर गए। लोग बेघर हो गए, खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया। रामघाट के पास मंदाकिनी पर बना पक्का पुल बह गया, कई रपटा और ग्रामीण सड़कें भी टूट गईं। इसी तबाही को देखने रविवार को सीएम योगी चित्रकूट आए थे। उन्होंने कई लोगों को राहत पहुंचाते हुए मंदाकिनी व अन्य नदियों का कैचमेंट एरिया साफ कराने के निर्देश दिए थे। उनके इस निर्देश पर लघु सिंचाई विभाग फिलहाल मंदाकिनी की लंबाई का आंकड़ा बता पा रहा है।
पुरखों ने भी मंदाकिनी की सफाई होते नहीं देखी
बुजुर्ग भी बता रहे कि उनके पुरखों ने भी कभी मंदाकिनी नदी की सफाई होते नहीं देखी। पीढ़ियां गुजर गईं, अफसर आए-गए, लेकिन नदी सिल्ट में बढ़ती रही। रही सही कसर शहर और गांव की सरकारें भी पूरी करने में जुटी हैं।
गांव व मोहल्लों की सफाई करने के बाद निकलने वाला कूड़ा कचरा नदी के किनारे फेंक देते हैं। कभी कभार तो सफाई के नाम पर खेल भी होता है। जेसीबी आती है, फोटो खिंचती है, मलबा निकालकर 10 मीटर दूर फिर नदी में ही डाल दिया जाता है। कागज पर नदी साफ, जमीन पर नाला।
रामघाट में मंदाकिनी 56 से 60 मीटर चौड़ी होगी ?
मंदाकिनी की लंबाई यूपी में 92 किमी और एमपी में 58 किमी है, लेकिन चौड़ाई की कभी पैमाइश नहीं हुई। रामघाट में यह 56 से 60 मीटर चौड़ी होगी। घनी आबादी के कारण बाढ़ का पानी फैल नहीं पाता और बस्ती में घुस जाता है।- एसके प्रसाद, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई विभाग