उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी की ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद अब चित्रकूट से मंगलवार से नौ दिन तक निकलने वाली नौ दिन चले अढ़ाई कोस वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के निकलने की आस भी जग गई।
अभी तक ये यात्रा नहीं निकलने की बात कही जा रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब जयदेव दास अखाड़ा की भी उम्मीद हिलोरे मारने लगी है। जयदेव दास अखाड़ा तरौंहा मंदिर के प्रमुख पुजारी रमाशंकर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पुरी की भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की अनुमति से खुशी की लहर है।
अब हमको भी उम्मीद हो गई है कि यहां की नौ दिन तक चलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा भी निकल सकती है। उन्होंने बताया कि मंगलवार (आज) को प्रशासन से वार्ता कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
गौरतलब हो कि नौ दिन चले ढाई कोस की रथयात्रा परेवा के दिन काष्ठ के पहियों में सुशोभित रथ में मूर्तियों को विराजमान कर द्विज के दिन कच्ची छावनी से होकर सदर बाजार फिर सोनेपुर में विश्राम करती थी। पंचमी के दिन मां जानकी सोनेपुर पहुंचकर बनाए गए स्थान को छोड़कर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा को वापस आने के लिए मना लेती हैं।
इस दिन विशाल मेला लगता था। षष्ठमी के दिन फिर सदर बाजार होते हुए कच्ची छावनी से नौवें दिन अखाड़ा पहुंचते थे। इस दौरान जगह-जगह भगवान की आरती पूजन व पुष्प वर्षा की जाती थी। सैकड़ों भक्त विशाल रथ को रस्सी से पकड़कर खींचते थे। भगवान जगन्नाथ की यात्रा में बेसन के लच्छेदार व सोन पापड़ी का नौ दिनों तक लोग भोग लगाते थे।
प्रमुख पुजारी ने बताया कि 23 जून से निकलने वाली यात्रा अबकी नहीं निकालने की बात थी, लेकिन सोमवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब उम्मीद जग गई है। बताया कि 50 साल से वह इस यात्रा में प्रमुख भूमिका निभाते रहे हैं। यह परंपरा तीन सौ साल पुरानी है।
कोरोना संक्रमण को भगवान जगन्नाथ बलभद्र व सुभद्रा ही दूर करेंगीं। इसके लिए नौ दिन तक विशेष पूजन होगा। पहले यात्रा तरौंहा से सोनेपुर गांव तक जाती थी। इसके बाद उसी रास्ते लौटती थी। नौ दिन चलने वाली इस यात्रा में अखाड़ा परिसर में ही भगवान की मूर्ति दर्शन को परिसर में फिलहाल रखी जाएगी। साथ ही सामाजिक दूरी नियम का पालन भी कराया जाएगा।