चित्रकूट। इस बार विधानसभा चुनाव में बदलते पाठा अंचल की तस्वीर नजर आई। अभी तक यहां मतदान के दौरान लोगों के सिर पर बंदूकों का साया हर वक्त रहता था पर इस बार यहां लोग बेखौफ होकर मतदान करते दिखे। दस्यु प्रभावित रहे सकरौंहा, चमरौंहा, बेलहरी, डोडामाफी,छेछरिहा खुर्द, ददरी, लखनपुर आदि गांव में सुबह से मतदान केंद्रों में महिला पुरुष मतदाताओं की लंबी लाइन इस बात का गवाह रही कि यहां बिना फरमान के मतदान मनमर्जी से हुआ है।
चित्रकूट में रविवार को मतदान जोरों से हुआ और कभी डकैतों से प्रभावित क्षेत्रों के लोग अपनी पसंद के उम्मीदवार को बेखौफ होकर वोट देते रहे। अब यहां के वोटरों पर न तो किसी ददुआ ठोकिया बलखड़िया का आदेश चलता है और न ही किसी बबुली कोल और गौरी यादव का जोर। जिले की मानिकपुर सीट का अधिकांश इलाका इस क्षेत्र में आता है। इसके अलावा चित्रकूट सदर और आसपास की भी सीटें प्रभावित होती रहीं हैं। पाठा के दुर्गम बीहड़ों में बसे ग्रामीण अब दुर्दांत डकैतों की गोली के खौफ में मतदान नहीं करते हैं। अपनी मर्जी से प्यार की बोली बोलने वाले उम्मीदवार के पक्ष में मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। डकैतों के सफाए के बाद सदियों से कायम पाठा के मतदाताओं पर डकैतों द्वारा फरमान जारी करने की कहानियां अब इतिहास बन गईं हैं।
यहां से बंदूकों का खौफ हटे बहुत अधिक समय नहीं बीता है। लगभग चार दशक से बीहड़ क्षेत्र लगभग 3 लाख मतदाताओं पर दुर्दांत डकैत अपने पसंदीदा दल के लिए अपनी मर्जी के मुताबिक ग्रामीणों को मतदान के लिए मजबूर कर देते थे। रात के समय गांव में एक जगह इकट्ठा करके सभी गांव वालों को मतदान करने का फरमान जारी करते थे। गोली के खौफ में बेबस ग्रामीण डाकुओं की मर्जी के मुताबिक ही अपनी मोहर लगाते थे। सकरौंहा, चमरौंहा, बेलहरी, डोडामाफी,छेछरिहा खुर्द, ददरी, लखनपुर इन गांव के बूथों में दोपहर 12 बजे तक 35 प्रतिशत मतदान हो गया था। इसके बाद तीन बजे तक मतदान की गति धीमी रही पर छह बजे तक फिर मतदाताओं का जोश सामने आया जिससे कई बूथों में साढे छह बजे तक मतदान होता रहा। कुल मिलाकर इन दस्यु प्रभावित गांवों में लगभग 55 प्रतिशत मतदान हुआ।