राजापुर। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज राजापुर को 50 साल बाद भी अपना भवन नहीं मिला है। जिला पंचायत के भवन में संचालित इस विद्यालय की दीवारें दरकी हैं। सीलन भरे कमरों में छात्राएं शिक्षा ले रही हैं।
विद्यालय में कक्षा 1 से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित हैं। वर्तमान सत्र में 1050 छात्राएं पंजीकृत हैं। कक्षा एक से पांच तक में 209 छात्राएं, कक्षा 6 से 8 तक में 204 छात्राएं व कक्षा 9 से 12 तक में 603 छात्राएं हैं। भवन की हालत बेहद जर्जर है। छतों का प्लास्टर उखड़ रहा है। छात्राओं की संख्या के हिसाब से पर्याप्त कमरों की व्यवस्था नहीं हैं। मजबूरी में पढ़ाई नीम के पेड़ के नीचे, बरामदे या गैलरी में करानी पड़ती है।
विद्यालय में 15 अध्यापिकाएं, एक लिपिक व 2 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। प्रधानाचार्य पार्वती देवी ने बताया कि 1972 से संचालित स्कूल के भवन में चार कमरे हैं। जिनकी दशा दयनीय है। कम से कम 25 कमरे, एक सभा हाल, एक लिपिक कक्ष व एक प्रधानाचार्य का कमरा होना चाहिए। करीब 15 साल पहले नगर के बाहर एक भवन का निर्माण शुरू हुआ था, जिसका काम कुछ दिनों में बंद हो गया। अब लोग उस भवन की चौखट-खिड़की, जंगले तक उखाड़ ले गए।
विद्यालय की सीनियर अध्यापिका निरुपमा गोस्वामी ने बताया कि विद्यालय भवन की दशा के बारे में जिले के अधिकारियों व क्षेत्र के प्रतिनिधियों को जानकारी दी गई है। आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
अध्यापकों की संख्या बढ़ने के साथ अब बच्चों की भी संख्या बढ़ गई है। मामला संज्ञान में है। प्रदेश सरकार के प्रोजेक्ट अलंकार के तहत अर्द्धनिर्मित भवन के लिए 2.44 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। संभव है कि जल्द स्वीकृत हो जाएगा। - बलिराज राम, डीआईओएस