चित्रकूट। आरपीएफ जवान की पीट-पीट कर हत्या मामले में जेल भेजी गई उनकी पत्नी की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। जिससे अभी हत्यारोपी पत्नी को जेल में ही रहना पड़ेगा। पुलिस ने अन्य आरोपी उसकी मां व दो बहनों की तलाश में तीन स्थानों पर छापेमारी की है लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है।
सतना मप्र के चौरहा निवासी आरपीएफ जवान बृजकिशोर की उनकी ससुराल सदर कोतवाली क्षेत्र के शंकरगंज स्थित घर के बाहर सोमवार को शव मिला था। जिसमें जांच पड़ताल के बाद स्पष्ट हो चुका है कि जवान के साथ ससुराल में विवाद मारपीट हुई और इसके बाद उसका शव गेट पर मिला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हो चुका है कि वजनदार चीज से सीने व अन्य स्थानों पर मारने से जवान की मौत हुई है। मामले में कोतवाली में पत्नी स्मृति द्विवेदी समेत मां व दो बहनों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार झा व कोतवाल अनिल सिंह के अनुसार जेल भेजी गई पत्नी स्मृति ने हत्या की बात स्वीकार की है। इसमें मृत जवान के ससुर समेत कुछ अन्य लोगों का भी हाथ हो सकता है जिसकी जांच की जा रही है।
शनिवार को जवान की हत्या में नामजद उनकी सास व दो सालियों की तलाश में कोतवाली पुलिस ने तीन स्थानों पर छापेमारी की लेकिन अभी सफलता नहीं मिली है। पुलिस का दावा है कि अगले 48 घंटे के अंदर फरार तीनों आरोपियों को दबोच लिया जाएगा। इधर, जेल में बंद मृत जवान की पत्नी स्मृति द्विवेदी के अधिवक्ता ने सीजेएम कोर्ट में जमानत की याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए जज ने जमानत याचिका खारिज कर दी है।
जवान की हत्या में पुलिस पर उठी उंगली
चित्रकूट। आरपीएफ जवान की हत्या के हाईप्रोफाइल मामले में अब नया मोड़ आ गया है। जिसमें चित्रकूूट पुलिस विभाग के एक बड़े अफसर समेत व्यापारी नेता व कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम आने से सभी अचंभित हैं। जवान के परिजनों ने पुलिसिया कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। मृतक के परिजनों ने स्पष्ट आरोप लगाया कि हत्यारोपी महिला की नामजद मां व उसकी दो बहनें दो दिन पहले पुलिस सुरक्षा में थी फिर अचानक गायब कैसे हो गईं। इसका सबूत उनके पास है। इसके अलावा उन्होंने हत्या मामले में पुलिस व कुछ अन्य लोगों की सहभागिता की भी आशंका जताई है। एसपी मनोज कुमार झा ने बताया कि मामले की पुलिस निष्पक्षता से जांच कर रही है। सभी के मोबाइल काल डिटेल की जांच हो रही है। पुलिस विभाग के कुछ अफसर, व्यापारी नेता व सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम आने पर उन्होंने कहा कि किसी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। ऐसे किसी पर सीधे आरोप लगाना सही नहीं है जांच में यदि कोई दोषी मिलेगा तो फिर कानून अपना काम करेगा। ब्यूरो