चित्रकूट। भगवान प्रभु श्रीराम की तपोस्थली धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि यह की मूर्तिकला के लिए भी बेमिसाल है। यहां पर दशकों से कलाकार मूर्तियां बना रहे हैं। ये कलाकार पत्थरों पर भगवान हनुमान, आंबेडकर, गोस्वामी तुलसीदास, दुर्गा और अन्य मूर्तियां बनाते और गढ़ते हैं। इनके द्वारा तैयार मूर्तियों को दूर-दराज से व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं।
कलक्ट्रेट रोड के पासी तिराहे के पास व धर्मनगरी के रामघाट के आसपास बस्ती में कलाकार पत्थर की मूर्तियां बनाते हैं। इस कार्य में 60 से ज्यादा परिवारों के लोग जुटे हैं। ये कलाकार पत्थर से मूर्तियां बनाने की कला में माहिर हैं। कारीगर दिन रात मूर्तियों को गढ़ते हैं। देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने के साथ ही महापुरुषों की मूर्तियां भी बनाते हैं। बताया कि देवांगना, खोह व भौंरी गांव की खदानों से पत्थर मिलता था। अब यह खदानें पूरी तरह से बंद हैं।
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मूर्ति कला में गुजर गईं पीढ़ियां
चित्रकूट। पत्थर की मूर्तियां बनाने वाले कारीगर सुरेश पयासी, राजू पयासी, कल्लू पयासी ने बताया कि मूर्तियां बनाने का कार्य पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है। पहले बाबा, फिर पिता और अब खुद वो यह कार्य कर रहे हैं। परिवार के सभी सदस्य मूर्तियां बनाते हैं।इस कार्य में ज्यादातर पासी समाज के लोग करते हैं। बड़ी मूर्ति 10 से 12 फीट की होती हैं। जिसे तीन से चार कारीगर मिलकर तैयार करते हैं। छोटी मूर्ति एक ही कारीगर तैयार कर लेता है। बड़ी मूर्ति बनाने में सात से अधिक दिन लग जाता है। जब कि छोटी मूर्तियां दो दिन के अंदर बन जाती हैं। बड़ी मूर्ति बनाने में एक कारीगर को दो हजार रुपये मिलता है। जबकि छोटी मूर्ति बनाने में एक हजार रुपये मिलता है।
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वाराणसी और मिर्जापुर से लाना पड़ता पत्थर
चित्रकूट। ठेकेदार नन्हा, आदर्श, विमल ने बताया कि लगभग आठ साल पहले चित्रकूट से पत्थर की खदानों में मूर्तियां बनाने के पत्थर मिल जाते थे। अब वाराणसी, मिर्जापुर से पत्थर लाना पड़ता है। यहां 600 रुपये स्क्वायर फीट के हिसाब से पत्थर मिलता है। जबकि चित्रकूट जिले में तीन सौ रुपये स्क्वायर फीट में पत्थर आसानी से मिल जाता था। बताया कि प्रयागराज, कौशांबी, सतना, पन्ना, बांदा, हमीरपुर आदि शहरों से समय समय पर मूर्तियां लेने के लिए व्यापारी आते है। एक व्यापारी 10 से 12 मूर्तियां ले जाते हैं। सबसे अधिक हनुमान की मूर्तियां ले जाते हैं। बड़ी मूर्ति में तीन हजार व छोटी मूर्ति में लगभग एक हजार रुपये लाभ होता है।
28 सीकेटीपी-10- परिचय- शहर में पत्थर की मूर्ति बनाता कलाकार। संवाद