चित्रकूट। जब भगवान राम को 14 साल का वनवास हुआ तो महर्षि वाल्मिकी ने उन्हें बताया कि चित्रकूट गिरि करहू निवासू। तहॅं तुम्हार सब भॉंति सुभासू सैलु सुहावन काबन चारू। कारि कोहरि मृग बिहारा बिहारू...। इसके बाद ही श्रीराम ने चित्रकूट को वनवास काल के लिए चुना। यही कारण था कि लंका विजय के बाद भी पुष्पक विमान पहले चित्रकूट के रामघाट के पास उतारकर मंदाकिनी में दीपदान किया, फिर अयोध्या के लिए रवाना हुए।
धर्मनगरी के दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्य जीवनदास ने बताया कि वनवास काल से लेकर लंका विजय तक प्रभु राम का चित्रकूट प्रेम ही इस क्षेत्र के संतों को सबसे प्रिय है। कामदगिरी मंदिर के प्रमुख संत मदनदास महाराज बताते हैं संत तुलसीदास ने रामचरित मानस में लिखा है कि चित्रकूट रघुनंदन छाए। समाचार सुन मुनि सब आए...बताया कि जब श्रीराम चित्रकूट आए थे। उस दौरान देवता सहित अनेक ऋषि दर्शन करने के लिए आए थे। इस लिए चित्रकूट का बड़ा महत्व है। यहां पर देश के कोने कोने से श्रद्धालु दीपदान के लिए धर्मनगरी में आते हैं।
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सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगी रही टीम
चित्रकूट। दिवाली मेला में सुरक्षा व्यवस्था के लिए यूपी-एमपी क्षेत्र में सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान तैनात रहे। डीएम शिवशरण्प्पा व एसपी अरुण कुमार सिंह ने मेला का निरीक्षण किया। मेला क्षेत्र में खोया पाया केंद्र बनाने के साथ ही स्काउट गाइड के बच्चे श्रद्धालुओं की सेवा कर रहे हैं। इसी प्रकार सतना मप्र के डीएम सतीश एस, एसपी हंसराज सिंह ने भी सुरक्षा व्यवस्था को परखा।संवाद