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चित्रकूट : बाढ़ उतरते ही बर्बादी शुरू

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राजापुर/मऊ। यमुना का जलस्तर तेजी से कम होते ही बर्बादी का मंजर दिखने लगा है। किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ से डूबे कच्चे घर गिरने लगे हैं। घरों की दीवारें दरकीं हैं। रास्तों और खेतों से कीचड़ की दुर्गंध से ग्रामीण परेशान हैं। बाढ़ प्रभावितों को राहत देने के लिए कृषि विभाग सहित प्रशासन की टीमों ने सर्वे शुरू कर दिया है।
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मऊ में तीन दिन में यमुना का जलस्तर चार मीटर तक घटा है। बुधवार की शाम यमुना का जलस्तर 88.50 मीटर रिकार्ड किया गया। बाढ़ प्रभावित गांवों से पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। मऊ के मवई कला गांव के बाढ़ पीड़ित मंगेश, रवी, मैयादीन, लोटन, सेवक श्याम भोला के मकान दरकने लगे हैं।
कीचड़ के दुर्गंध से लोग परेशान हैं। गांव के प्रेमशंकर, इंद्रेश त्रिपाठी, गुड्डन, देवनाथ, कमलाकर शुक्ल, भइयन विश्वकर्मा ने प्रशासन से मलबा हटवाने, सफाई कराने की मांग की है। राजापुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित संतोष कुमार, राममिलन, समोखिया, रामदुलारी, भोंडी रनुआ सुमित्रा के घर और फसलों का नुकसान हुआ है। अनुमान लगाया जा रहा है कि छह हजार हेक्टेयर में बोई गई फसल बर्बाद हो गई है।
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जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में फसलों की क्षति का आकलन करने के लिए टीमें बना दी गई हैं। राजस्व कृषि व बीमा कंपनी के कर्मचारियों की संयुक्त टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में जाकर क्षति का सर्वेक्षण कर रही हैं।
बाढ़ प्रभावितों को राहत किट का वितरण सरधुआ ग्राम पंचायत के पंचायत भवन में किया गया। सांसद प्रतिनिधि शक्ति प्रताप सिंह तोमर, एसडीएम प्रमोद झा, नायब तहसीलदार पुष्पेंद्र सिंह गौतम ग्रामीणों को खाद्य सामग्री, मोमबत्ती, तिरपाल आदि सामान दिए।
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