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बाल कैदियों को बांट रहे कला का हुनर

Sun, 04 Sep 2016 10:58 PM IST
चित्रकूट
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आर्ट शिक्षक विनय साहू। - फोटो : अमर उजाला
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बचपन से ही चित्रकला के प्रति रुचि ने विनय साहू को कलाकार बना दिया । महज 27 वर्ष की उम्र में ही उन्हें नेशनल अवार्ड समेत छह अवार्ड से नवाजा गया। सीआईसी कालेज मेें शिक्षक बनने के बाद कई बच्चों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे है।
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शहर के पुरानी बाजार निवासी विनय साहू पुत्र जग्गू प्रसाद साहू ने बताया कि बचपन से ही उनमें फाइन आर्ट के प्रति रुचि थी। उन्होंने ग्रामोदय विश्वविद्यालय से बीएफए की डिग्र्री ली। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने से 2007 में चित्रकला की कोचिंग शुरू कर दी।

चित्रकला के प्रति लोगों का रुझान बेहद कम होने के कारण कोचिंग के लिए छात्र भी नहीं मिलते थे। धीरे-धीरे उनकी ख्याति बढ़ी और आगे चलकर उन्हें सीआईसी कालेज में फाइन आर्ट सिखाने की नौकरी मिल गई।
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कई छात्र इनसे फाइन आर्ट की कला सीखकर आगे बढ़े। जिसमें अजय पटेल को दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश मिल गया है। पहली बार बुंदेलखंड से किसी बच्चे को फाइन आर्ट से दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश मिला है।


विनय साहू को विभिन्न कैंपों में अच्छा प्रदर्शन करने पर कई अवार्ड भी मिल चुके हैं। जिसमें नेशनल अवार्ड काशी विद्यापीठ व इंटर नेशनल ओडिसा कैंप में मिला है। इसके अलावा जिले से कई बार मेद्या सम्मान भी मिला है।


इन्होंने चावल के दानों में चित्र बनाकर पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, बाबा रामदेव, फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा व इंटरनेशनल आर्टिस्ट जीवन दास को भेंट किया है। शहर में खुले बाल सुधार गृह में भी आर्ट की कला सिखाने को प्रशासन ने उन्हें अनुमति दी है। अजय इन बाल कैदियों को कला का हुनर देकर इनका भविष्य बेहतर बना रहे हैं।
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